इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज में शर्मनाक हार के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने पूर्व कप्तान रवि शास्त्री को सोमवार से शुरू होने जा रही एकदिवसीय सीरीज के लिए डायरेक्टर नियुक्त किया है।
इस सीरीज के लिए पूर्व आलराउंडर संजय बांगड और पूर्व तेज गेंदबाज भारत अरुण को सहायक कोच के रूप में और आर श्रीधर को फील्डिंग कोच की भूमिका दी गई है।
लेकिन इससे भारतीय क्रिकेट को लेकर उठे सवाल शांत नहीं हुए हैं। खेल के जानकार जहां इस नियुक्ति से हैरान हैं, वहीं उन्हें लगता है कि रातों रात कुछ नहीं बदलने वाला है।
क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगजीन की राय
रवि शास्त्री कौन सा तीर मार लेंगे, या रातों-रात टीम का प्रदर्शन सुधारने का कौन सा मंत्र दे देंगे। अगर टीम वनडे सीरीज में अच्छा खेलेगी तो वह अपने बल बूते पर खेलेगी।
रवि शास्त्री आईसीसी अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के खास आदमी है इसलिए उन्हे यह पद सौंपा गया है, लेकिन वास्तव में यह मजाक है। भारतीय टीम तो वनडे में वैसे ही दूसरे नंबर की टीम है। बात तो टेस्ट क्रिकेट की होनी चाहिए।
दूसरी बात, क्या बोर्ड की जिम्मेदारी नहीं है कि वह पिछले चार-पांच साल में टीम की हालत की जिम्मेदारी खुद ले ना कि कोच को कसूरवार ठहराए जबकि मैदान में तो कप्तान और खिलाड़ी खराब या अच्छा खेलते हैं।
बदलाव पर क्या बोले पूर्व कोच मदन लाल?
भारतीय क्रिकेट टीम बुरी तरह टेस्ट सीरीज हारी है, ऐसे में बोर्ड की काफी बदनामी हो रही है।
इस बात को दबाने के लिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की है कि देखिए हमने रवि शास्त्री को डायरेक्टर बना दिया है, लेकिन रवि शास्त्री के आने से टेस्ट सीरीज के शर्मनाक परिणाम तो नहीं बदल जाएंगे।
पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा की राय
क्रिकेट में डायरेक्टर का क्या रोल है, यह तो मुझे भी नहीं पता। क्रिकेट प्रेमी की बात तो छोडिए मैं क्रिकेटर रह चुका हूं, मैंने कभी क्रिकेट डायरेक्टर के साथ काम नही किया।
क्रिकेट में हेड कोच, सहायक कोच, फील्डिंग, बैटिंग, गेंदबाजी कोच सहायक कोच होते है, लेकिन डायरेक्टर नहीं।
रवि शास्त्री के पास कितनी ताक़त होगी, वह कैसे काम करेंगे, क्या उनके पास कप्तान और कोच को खिलाफ वीटो पावर होगी अभी कहना मुश्किल है।
किसी भी चीज को बदलने में समय लगता है। चाहे वह रवि शास्त्री हो, संजय बांगड़ हो, भारत अरूण हो या फिर श्रीधर, इन्हें समय देना पडेगा। एक सिरीज़ से किसी भी बदलाव की उम्मीद अभी करना मुश्किल है, यह सोच ग़लत है, यह धारणा जल्दी टूट जाएगी।