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खुलासा: आखिर क्या हुआ था उस दिन, जब धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से लिया था संन्यास, शास्त्री ने बताया सबकुछ

Fri, 03 Sep 2021 06:30 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने जब टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का एलान किया था आखिर उस क्या हुआ था, इसका खुलासा टीम इंडिया को मुख्य कोच रवि शास्त्री ने अपनी नई किताब Stargazing: The players in my life में किया है।
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एमएस धोनी और रवि शास्त्री - फोटो : ट्विटर
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विस्तार
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टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का काम करने का तरीका ही कुछ अलग था। वह शोर-शराबे से इतर कोई भी फैसला अचानक ही लेते थे। बीते साल जैसे उन्होंने 15 अगस्त के दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। उनके इस फैसले ने सबको हैरानी में डाल दिया था। ठीक इसी तरह माही ने साल 2014 में टेस्ट क्रिकेट से अचानक संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी। उस समय भी धोनी के लिए गए इस फैसले ने सबको चौंका दिया था। बता दें कि उस समय भारतीय टीम ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर थी। जब धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का एलान किया था आखिर उस क्या हुआ था, इसका खुलासा टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री ने हाल ही में प्रकाशित अपनी किताब Stargazing: The players in my life में किया है।

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शास्त्री ने अपनी किताब में बताया है कि, धोनी के इस फैसले के बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता था। मेलबर्न में सीरीज का तीसरा टेस्ट खेला जा रहा था। हमने आखिरी दिन मैच ड्रॉ करा लिया था और धोनी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाना था। कॉन्फ्रेंस में जाने से पहले उन्होंने मुझसे कहा कि रवि भाई, जब मैं वापस लौटूंगा, तो मुझे साथी खिलाड़ियों से बात करनी है। तब मैंने उन्हें कहा था कि आप टीम के कप्तान हैं, बिल्कुल बात कर सकते हैं।' बता दें कि एमएस उस समय अच्छी फॉर्म में थे और वह अपने सौ टेस्ट से सिर्फ 10 मैच ही दूर थे। धोनी ने जिस वक्त संन्यास लेने की घोषणा की थी उस वक्त शास्त्री टीम इंडिया के निदेशक पद पर थे।

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धोनी निडर और निस्वार्थ इंसान हैं
शास्त्री ने अपनी किताब में आगे लिखा कि धोनी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लौटे और घोषणा कर दी कि यह मेरा आखिरी टेस्ट मैच था। धोनी इसी तरह के इंसान हैं। वो निडर और निस्वार्थ हैं। उन्होंने बीच सीरीज में इतना बड़ा फैसला लेकर इस बात को साबित कर दिया था। मैंने धोनी को मनाने की कोशिश कि वो अपने फैसले पर दोबारा विचार करें। वो तब भी टीम के तीन सबसे फिट खिलाड़ियों में से एक थे। उनके पास अपने टेस्ट करियर को और बेहतर करने का मौका था।

धोनी के लिए निजी रिकॉर्ड मायने नहीं रखते
शास्त्री ने अपनी किताब में आगे लिखा कि धोनी के पास 100 टेस्ट खेलने का मौका था। मगर उनके लिए निजी रिकॉर्ड मायने नहीं रखते हैं। मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन एमएस की सोच में दृढ़ता थी। यह सही है कि उनकी उम्र बढ़ रही थी, लेकिन वह उतने उम्रदराज भी नहीं थे। फिर भी उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को छोड़ने का फैसला कर लिया। अब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो मुझे लगता है कि उनका निर्णय सही था।

पिछले साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा था अलविदा
धोनी ने पिछले साल 15 अगस्त के दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। इससे पहले धोनी ने साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अचानक टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी। बता दें कि धोनी ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच जुलाई 2019 में न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व कप (सेमीफाइनल) में खेला था। यह मुकाबला भारत हारा था।
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क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल और चतुर कप्तान
धोनी भारतीय क्रिकेट टीम इतिहास के सबसे दिग्गज खिलाड़ियों में शुमार हैं। वह एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जो कभी बल्ले से तो कभी विकेट के पीछे से तो कभी मैदान पर अपने सूझ-बूझ भरे फैसलों से विरोधी टीम को चित कर चुके हैं। उन्हें क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल और चतुर कप्तानों की सूची में शामिल किया जाता है।

यह उपलब्धि हासिल करने वाले इकलौते कप्तान
धोनी आईसीसी की सभी तीन ट्रॉफी जीतने वाले एकमात्र कप्तान हैं। धोनी की कप्तानी में भारत ने 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप, 2011 में उनकी कप्तानी में भारत ने दूसरी बार वर्ल्ड कप का खिताब जीता। वहीं, धोनी की कप्तानी में भारत ने 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब भी अपने नाम किया। धोनी ने टीम इंडिया के लिए तीन आईसीसी ट्रॉफी जीतकर देश का मान बढ़ाया।
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