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29 साल के इतिहास में भारत ने देखे 16 कोच, रवि शास्त्री को तीसरी बार मिली जिम्मेदारी 

Fri, 16 Aug 2019 07:44 PM IST
Mukesh Jha स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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Ravi Shastri
रवि शास्त्री एक बार फिर टीम इंडिया के मुख्य कोच बन गए हैं। शुक्रवार को मुंबई में 1983 विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव की अगुआई वाली तीन सदस्यीय क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) ने शास्त्री समेत छह उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया, जिसमें शास्त्री के नाम पर मुहर लगाई गई। इसके साथ ही वह अपने पद पर अगले दो साल तक बने रहेंगे। वह तीसरी बार टीम इंडिया के कोच चुने गए हैं।

टीम इंडिया के हेड कोच बनने की होड़ में शास्त्री समेत छह लोग शामिल थे। शास्त्री के अलावा श्रीलंका के पूर्व कोच टॉम मूडी, माइक हेसन, फिल सिमंस, लालचंद राजपूत और रॉबिन सिंह कोच पद के शॉर्टलिस्ट हुए थे। मालूम हो कि वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में मिली हार के आठ दिन बाद ही बीसीसीआई में उथल-पुथल मच गई थी और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने हेड कोच समेत पूरा कोचिंग स्टाफ बदलने के लिए आवेदन जारी कर दिया था। 

इसके बाद टीम इंडिया के कोच पद के लिए हजार से ज्यादा आवेदन आए, लेकिन उनमें से इंटरव्यू के लिए सिर्फ छह उम्मीदवारों को चुना गया, लेकिन अंतिम मुहर शास्त्री पर लगी। ऐसे में अगर 29 साल के इतिहास (1990 से) की अगर बात करें तो भारत ने अब तक 16 कोच देखे हैं, जिनमें 4 कोच विदेशी रहे। ऐसे में उन कोचों पर डालते हैं एक नजर...  
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बिशन सिंह बेदी - फोटो : india today
बिशन सिंह बेदी (1990-91)
पूर्व भारतीय स्पिनर बिशन सिंह बेदी का भारतीय राष्ट्रीय टीम के कोच के रूप में एक संक्षिप्त कार्यकाल था। वह पहले व्यक्ति थे जिन्हें इस काम के लिए पूर्णकालिक क्षमता में नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल में भारतीय टीम का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा था।
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अब्बास अली बेग - फोटो : सोशल मीडिया
अब्बास अली बेग (1991-92)
बिशन सिंह बेदी के बाद अब्बास अली बेग को भारतीय टीम का कोच नियुक्त किया गया। 1991-92 में भारत का ऑस्ट्रेलियाई दौरा काफी निराशाजनक रहा था। भारत को पांच में से चार टेस्ट मैचों में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भारतीय टीम 1992 विश्व कप के सेमीफाइनल में भी प्रवेश नहीं कर पाई। अब्बास अली बेग और मैनेजर को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

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अजित वाडेकर
अजीत वाडेकर (1992-96)
अब्बास अली बेग के बाद भारतीय टीम की कमान अजीत बाडेकर के हाथों में दी गई। भारत की ओर से टेस्ट एवं वनडे क्रिकेट खेलने वाले अजीत वाडेकर 1992 से 1996 तक भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रहे। कोच के रूप में अजीत वाडेकर के कार्यकाल के दौरान सचिन तेंदुलकर और मोहम्मद अजहरूद्दीन टेस्ट और वनडे टीम के कप्तान थे।
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संदिप पाटिल
संदीप पाटिल (1996)
1996 विश्व कप में वह अजीत वाडेकर के असिस्टेंट मैनेजर थे। वह 1996 में इंग्लैंड में मोहम्मद अजहरुद्दीन और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच हुए झगड़े के दौरान टीम के कोच थे। इसके बाद सिद्धू दौरा बीच में ही छोड़ भारत आ गए थे। श्रीलंका में चार देशों के टूर्नामेंट के दौरान एक मैच के दौरान जब सचिन तेंदुलकर भारत के कप्तान थे तब हालात और खराब हुए। भारत के ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में नौ विकेट गिर चुके थे। तभी कुंबले स्लॉग शॉट खेलकर आउट हो गए। पाटिल ने इस पर नाराजगी जताई। तेंदुलकर और अन्य सीनियर खिलाड़ियों को यह अच्छा नहीं लगा। टोरंटो में सहारा कप में पाकिस्तान से हार के साथ ही पाटिल को उनके पद से हटा दिया गया।
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मदन लाल
मदन लाल (1996–1997)
1996-97 में मदन लाल को भारत का कोच बनाया गया। भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच जीता। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में अच्छा प्रदर्शन किया। साउथ अफ्रीका के खिलाफ ईडन गार्डन्स टेस्ट मैच में अजहरुद्दीन की कोहनी में ब्रायन मैकमिलन की गेंद लगी। इसके बाद मदन लाल ने कहा कि अजहर तेज गेंदबाजी का सामना करने से बच रहे थे। तीसरे दिन अजहर बल्लेबाजी करने उतरे और महज 77 गेंदों पर 109 रन बना दिए।
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अंशुमन गायकवाड़
अंशुमन गायकवाड़  (1997–1999, 2000) 
मदन लाल के बाद अंशुमन गायकवाड़ 1997 से 1999 तक भारतीय टीम के कोच रहे। उन्हें एक बार फिर 2000 में टीम इंडिया को कोच बनाया गया। इनके कार्यकाल में टीम इंडिया ने 2-1 से ऑस्ट्रेलिया पर जीत दर्ज की थी। इन्हीं के कार्यकाल में अनिल कुंबले ने पाकिस्तान के खिलाफ 10 विकेट हॉल लिए थे और न्यूजीलैंड के खिलाफ वन-डे सीरीज ड्रॉ हुआ था।

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KAPIL DEV
कपिल देव (1999–2000)
कपिल देव 1999 से 2000 तक भारतीय टीम के कोच रहे। उनका कार्यकाल एक साल तक रहा। तेंदुलकर की कप्तानी में कपिल देव भारतीय टीम के कोच बने। यह जोड़ी भी हालांकि कामयाब साबित नहीं हुई। भारत ने घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड को टेस्ट और वनडे सीरीज में हराया। लेकिन इसके बाद ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज में 0-3 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद त्रिकोणीय सीरीज में भारत ने 8 में से 7 मैच हारे। घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका से टेस्ट सीरीज हारने के बाद तेंदुलकर ने कप्तानी छोड़ दी। इसके बाद गांगुली ने कप्तानी संभाली। मनोज प्रभाकर ने एक स्टिंग ऑपरेशन में मैच फिक्सिंग में कपिल देव का नाम लिया। इसके बाद देव ने कोचिंग छोड़ दी। रिपोर्ट्स में तो यह भी कहा गया कि खिलाड़ी कपिल की कोचिंग स्टाइल से सहमत नहीं थे। 

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जॉन राइट - फोटो : social media
जॉन राइट (2000–2005)
न्यूजीलैंड की ओर से टेस्ट एवं वनडे क्रिकेट खेलने वाले जॉन राइट ने 2000 से 2005 तक भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में काम किया था। जॉन राइट भारतीय क्रिकेट टीम के पहले विदेशी कोच थे। जॉन राइट के कार्यकाल के दौरान 2001 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया की मजबूत टीम को टेस्ट मैचों में 2-1 से पराजित किया था। इसके अलावा भारतीय टीम 2003 के क्रिकेट विश्वकप के फाइनल में भी पहुंची थी। कोच के रूप में जॉन राइट के कार्यकाल के दौरान सौरभ गांगुली टेस्ट और वनडे टीम के कप्तान थे। कप्तान और कोच की इस जोड़ी ने न सिर्फ टीम को एकजुट किया बल्कि देश-विदेश में कई बड़ी जीत दिलाने में अहम निभाई। वह इस पद पर सबसे ज्यादा समय (5 साल) रहने वाले वाले एकमात्र कोच हैं।

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ग्रेग चैपल
ग्रैग चैपल (2005-07)
2005-07 के करीब दो साल भारतीय क्रिकेट के लिए काफी मुश्किल माने जाते हैं। जॉन राइट की कोचिंग के बाद चैपल ने टीम की कमान संभाली। चैपल को सौरभ गांगुली की सलाह पर ही कोच बनाया गया था। चैपल के साथ भारतीय क्रिकेट के संबंध काफी खराब रहे। खास तौर पर गांगुली के साथ ही उनके संबंधों को लेकर काफी विवाद रहे। आखिर में गांगुली के स्थान पर द्रविड़ को भारत की कमान दी गई। चैपल के भारतीय सीनियर्स के साथ काफी खराब संबंध रहे।

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ravi shastri
रवि शास्त्री
ग्रैग चैपल के बाद रवि शास्त्री ने टीम इंडिया की कुछ समय के लिए कमान संभाली। हालांकि, उनका कार्यकाल काफी छोटा था। वह कुछ महीनों के लिए अंतरिम कोच बने। इसके बाद फिर टीम इंडिया  की कमान दक्षिण अफ्रीका के पूर्व खिलाड़ी गैरी कर्स्टन को दी गई।
 

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गैरी कर्स्टन - फोटो : getty
गैरी कर्स्टन (2008-11)
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर गैरी कर्स्टन ने 2008 से 2011 तक भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में काम किया था। गैरी कर्स्टन के कार्यकाल में भारतीय टीम पहली बार टेस्ट रैंकिंग में पहले स्थान पर पहुंची थी और 28 साल बाद क्रिकेट विश्वकप की विजेता बनी थी। कोच के रूप में गैरी कर्स्टन के कार्यकाल के दौरान महेन्द्र सिंह धोनी और अनिल कुंबले टेस्ट टीम के जबकि महेन्द्र सिंह धोनी वनडे और टी-20 टीम के कप्तान थे। टीम इंडिया को वर्ल्ड चैम्पियन बनाने के बाद जब बतौर कोच उनका करियर बुलंदी पर था तो उन्होंने बीसीसीआई के साथ अपने करार को आगे बढ़ाने से मना कर दिया। 

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duncan fletcher
डंकन फ्लेचर (2011-15): 
गैरी कर्स्टन के बाद बीसीसीआई ने जिम्बाब्वे के पूर्व क्रिकेटर डंकन फ्लेचर को मुख्य कोच बनाया। फ्लेचर (2011 से 2015) के कोचिंग कार्यकाल में टीम इंडिया 2015 के वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल तक पहुंचने में कामयाब रही थी। फ्लेचर के कार्यकाल के दौरान महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट की तीनों विधाओं (टेस्ट, वनडे और टी-20) में टीम के कप्तान थे। टेस्ट में टीम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा।

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ravi shastri
रवि शास्त्री (2014-16)
डंकन फ्लेचर के बेहद खराब कार्यकाल के बाद बीसीसीआई का विदेशी कोच के रूप में मोहभंग हो गया और रवि शास्त्री को टीम का डायरेक्टर बनाया गया। वह 2014 से 2016 तक टीम डायरेक्टर के रूप में रहे। टीम डायरेक्टर और कोच के रूप में रवि शास्त्री के कार्यकाल में ही महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट से संन्यास लिया और विराट कोहली टेस्ट टीम जबकि धोनी वनडे और टी-20 टीम के कप्तान थे। उनके इस कार्यकाल में भारत ने श्रीलंका में और घर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज जीती थी। एशिया कप टी-20 में जीत के बाद टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भी टीम इंडिया पहुंची। साथ ही टी-20 क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया को उसके ही घर में पहली बार हराया।

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कुंबले और द्रविड - फोटो : सोशल मीडिया
अनिल कुंबले (2016-17)
भारत की ओर से टेस्ट एवं वनडे में सर्वाधिक विकेट लेने वाले और भारत के पूर्व टेस्ट कप्तान अनिल कुंबले 24 जून 2016 से 20 जून 2017 तक भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच थे। अनिल कुंबले के कार्यकाल में भारतीय टीम टेस्ट मैचों में फिर नंबर 1 टीम बनी। कोच के रूप में अनिल कुंबले के कार्यकाल के दौरान विराट कोहली और आजिंक्य रहाणे ने टेस्ट मैचों में एवं महेन्द्र सिंह धोनी और विराट कोहली ने वनडे मैचों में कप्तानी की है। इस दौरान टीम इंडिया ने लाजवाब खेल दिखाया और वेस्टइंडीज में टेस्ट सीरीज जीती। कुंबले के कार्यकाल में टीम इंडिया ने 13 में से महज एक टेस्ट मैच में हार का सामना किया। लेकिन टीम में उनके सख्त बर्ताव के कारण कप्तान विराट कोहली से अनबन हो गई और उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया गया।

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रवि शास्त्री और विराट कोहली - फोटो : सोशल मीडिया
रवि शास्त्री (11 जुलाई 2017 से 15 अगस्त 2019 तक)
अनिल कुंबले की विदाई के बाद रवि शास्त्री फिर से कोच बने। उनकी कोचिंग में टीम इंडिया वर्ल्ड कप 2019 के सेमीफाइनल में पहुंची लेकिन आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद वेस्टइंडीज दौरे के लिए उनका व अन्य कोचिंग स्टाफ का कार्यकाल 45 दिन के लिए बढ़ाया गया था।
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रवि शास्त्री और विराट कोहली - फोटो : सोशल मीडिया
रवि शास्त्री (2019 से जारी)
रवि शास्त्री को एक बार फिर टीम इंडिया का नया कोच बनाया गया है। कपिल देव की अध्यक्षता वाली क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी ने शुक्रवार शाम को मुंबई में इसकी घोषणा की। रवि शास्त्री अगले दाे साल तक टीम इंडिया के मुख्य कोच पर पर बने रहेंगे। भारत ने शास्त्री की कोचिंग में जुलाई 2017 से 21 में से 13 टेस्ट मैचों में जीत हासिल की। उनका जीत का औसत रहा 52.38। वहीं, टी20 अंतरराष्ट्रीय में 69.44 जीत औसत के साथ भारत ने 36 में से 25 मैच जीते। वनडे मैचों में तो यह रेकॉर्ड 71.67 का रहा जहां उसने 60 में से 43 मैचों में जीत हासिल की
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