प्रेरक मांकड़ (27 रन देकर एक विकेट), धर्मेंद्रसिंह जडेजा (72 रन देकर एक विकेट) और कमलेश मकवाना (46 रन देकर एक विकेट) ने एक एक विकेट चटकाए। रविवार होने के बावजूद स्टैंड खाली पड़े थे, केवल कुछ छात्र ही घरेलू टीम के लिये चीयर करते दिखे।
बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सकारिया को शुरू से ही स्विंग मिलनी शुरू हो गई, उन्होंने आर संजय (02) को जबकि उनादकट ने अपनी स्विंग और बाउंस से फजल को परेशान किया। सकारिया को जल्द ही सफलता मिली और संजय अलसाया शाट खेलकर पहली स्लिप में खड़े अर्पित वासवडा को कैच देकर आउट हुए।
फजल भी जल्द ही रन आउट होकर पवेलियन लौट गए, उन्होंने क्रीज से कुछ कदम की दूरी पर अपनी रफ्तार कम कर दी क्योंकि उन्हें लगा कि थ्रो दूसरे छोर पर जा रहा है। सकारिया ने मूव होती गेंद से जाफर को तंग किया और आउट करने की अपील की लेकिन अंपायर ने इसे अस्वीकार कर दिया।
जाफर डिफेंसिव होकर खेल रहे थे और शायद ऐसा इसलिये था क्योंकि दो विकेट गिर चुके थे। काले के साथ उन्होंने पारी को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। वह सिर्फ गेंद को ड्राइव और पुश करके रन जुटा रहे थे।
लंच से पहले उनादकट ने जाफर का विकेट झटक लिया जिन्होंने पैर उठाये बिना शाट खेला और गेंद उनके बल्ले को चूमती हुई विकेटकीपर के हाथों में समां गयी। यह विकेट उनकी टीम के लिये काफी अहम था और इसका उन्होंने पूरा जश्न मनाया।
लंच तक टीम ने 33 ओवर में 67 रन पर तीन विकेट खो दिए थे। काले और गणेश ने खेलना शुरू किया, पर उनादकट ने दूसरे सत्र के शुरू में गेंदबाजी नहीं की। जडेजा ने काले को आउट करने का मौका बनाया, पर हार्विक देसाई देर से सतर्क हुए और इसे चूक गए।
हालांकि आफ स्पिनर मकवाना ने काले को ऐसा ही शाट खेलने को बाध्य किया और इस बार देसाई मौका नहीं चूके। सतीश सकारात्मक बल्लेबाजी करते रहे, उन्होंने स्पिनरों के खिलाफ अपने पैरों का अच्छा इस्तेमाल किया और विदर्भ की पारी में अहम भूमिका अदा की।
इसी मैदान पर क्वार्टरफाइनल में उत्तराखंड के खिलाफ 98 रन की पारी खेलने वाले विकेटकीपर वाडकर की मदद से मेजबान ने चाय तक चार विकेट पर 130 रन बना लिये थे। मांकड ने सतीश का विकेट झटका जबकि जडेजा ने आदित्य सरवटे को अंतिम सत्र में खाता नहीं खोलने दिया। सकारिया ने स्टंप से तीन ओवर पहले वाडकर को आउट किया। इनपुट-भाषा