भारतीय क्रिकेट में जूनियर खिलाड़ियों द्वारा की जा रही उम्र संबंधी हेराफेरी की बढ़ती घटनाओं के बीच बीसीसीआई और कोच राहुल द्रविड़ ने इस पर सख्ती बरतने का मन बना लिया है।
भारत की अंडर-19 टीम के कोच राहुल द्रविड़ का मानना है कि बीसीसीआई कार्यकारिणी के जूनियर वर्ल्ड कप में खिलाड़ियों को केवल एक साल खेलने की अनुमति देने के फैसले से खिलाड़ियों द्वारा उम्र में की जाने वाली हेराफेरी रुकेगी।
द्रविड़ ने कहा, "अंडर-19 वर्ल्ड कप में केवल एक बार खेलने की अनुमति देने का मतलब होगा कि लोग उम्र में हेराफेरी के लिए कम प्रेरित होंगे। ईमानदारी से कहूं तो अंडर-19 क्रिकेट परिणाम नहीं बल्कि खिलाड़ियों को अनुभव दिलाने से जुड़ा है। उद्देश्य जीतने के बजाय अधिक से अधिक युवाओं को मौका देना होना चाहिए। और इस नए नियम से ऐसे परिणाम मिलेंगे।"
उन्होंने कहा, "इस कदम से जो लंबी अवधि के परिणाम मिलेंगे वे लघु अवधि में संभावित हार से अधिक से महत्वपूर्ण होंगे। बीसीसीआई ने नियम बनाया है और इससे अगली पीढ़ी के क्रिकेटरों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अंडर-19 स्तर पर केवल दो साल खेलने का विचार बुरा नहीं है। हमने सुना है कि कई बार खिलाड़ियों ने अंडर-16 स्तर पर अस्थि परीक्षण ‘बोन टेस्ट’में हिस्सा नहीं लिया और वे कई वर्षों तक अंडर-19 स्तर पर खेलते रहे। इस फैसले के बाद इन लोगों के प्रयास विफल होंगे। इस स्तर पर क्रिकेटर यदि अच्छे होते हैं तो अगले स्तर पर पहुंचने के लिए उनका अंडर-19 क्रिकेट में दो साल तक खेलना पर्याप्त है।"
जडेजा समेत कुछ बड़े क्रिकेटर जो 2 बार अंडर-19 वर्ल्ड कप खेले हैं
ravindra jadeja
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टीम इंडिया के दिग्गज ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा (2006 और 2008) और अंडर-19 टीम के कप्तान रहे विजय जोल (2012 और 2014) के अलावा संदीप शर्मा (2010 और 2012), सरफराज खान (2014 और 2016), रिकी भुई (2014 और 2016) तथा अवेश खान (2014 और 2016) उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने हाल के वर्षों में अंडर-19 वर्ल्ड कप में दो बार हिस्सा लिया।
2 साल के अंदर जारी बर्थ सर्टिफिकेट को ही स्वीकार करे BCCI
rahul dravid
साथ ही राहुल द्रविड़ ने सुझाव दिया कि बीसीसीआई को यह तय करना चाहिए कि वह किसी भी क्रिकेटर के जन्म से 2 साल के अंदर जारी बर्थ सर्टिफिकेट को ही स्वीकार करे। उन्होंने कहा, "लोगों में एक आम प्रचलन यह भी है कि 10-12 साल की उम्र में युवा बच्चे स्कूल बदल लेते है और नया बर्थ सर्टिफिकेट बनवा लेते हैं। दुर्भाग्य से मैंने सुन रखा है कि नया बर्थ सर्टिफिकेट लेना मुश्किल नहीं है। बीसीसीआई को यह तय करना चाहिए कि उसी बर्थ सर्टिफिकेट को स्वीकार करे जो बच्चे के जन्म के 2 साल के अंदर आधिकारिक संस्था की ओर से जारी की गई हो।"
43 साल के पूर्व क्रिकेटर द्रविड़ का मानना है कि कोई भी क्रिकेटर जो राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दो साल तक जूनियर क्रिकेट खेल चुका हो वह अगले स्तर तक खेल सकता है।
उन्होंने कहा, "ऐसे मामले में अंडर-23 के मैच हैं जो एक और मंच प्रदान करेगा। किसी युवा खिलाड़ी को अंडर-19 में तीन-चार साल तक बनाए रखने का कोई मतलब नहीं है विशेषकर यदि उसने 16-17 साल की उम्र में प्रवेश किया होगा।"