टीम इंडिया कई टेस्ट मैच 10 विकेट से हारी है। इंग्लैंड के खिलाफ अपनी जमीं पर मिली यह हार कई साल तक याद रहेगी। देखा जाए तो इस मैच में हार से उतना दर्द नहीं हुआ जितना कि हार के तरीके से! भारत अपने ही जाल में इस कदर फंसा कि (दूसरों के लिए गढढा खोदने वाला...खुद उसमे गिर जाता है) यह कहावत सच लगने लगी।
भारत अपने ही हथियार से इस कदर घायल हो गया कि उसे अपनी ताकत का फिर से आंकलन करने की जरूरत पड़ गई है। धोनी की टर्निंग ट्रैक की जिद ने टीम को मुंबई में पूरी तरह नचा डाला। भारत चौथे दिन की शुरुआत में ही मैच बुरी तरह हार गया। धोनी ने इस मैच से पहले इस बात के संकेत दिए था कि यह मैच साढ़े तीन दिन में ही खत्म हो जाएगा। धोनी की यह बात तो सच हो गई लेकिन धोनी के सिर जीत का सेहरा नहीं सजा बल्कि उन्हें शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा।
पिछले साल इंग्लैंड दौरे पर 0-4 से शर्मनाक पराजय झेलने वाली टीम इंडिया ने दावा किया था कि वह इस सीरीज में इंग्लैंड का सूपड़ा साफ कर उस हार का बदला लेगी लेकिन कप्तान धोनी की मनमाफिक वानखेडे स्टेडियम की टर्निंग पिच मेजबान टीम के लिए ही भस्मासुर बन गई और उसे इंग्लैंड को सीरीज में वापसी का मौका दे दिया। इंग्लैंड को अहमदाबाद में पहले टेस्ट में नौ विकेट से हार का सामना करना पडा था लेकिन उसने अपने बल्लेबाजों और स्पिन गेंदबाजों के दम पर मुंबई टेस्ट जीतकर सीरीज में शानदार वापसी करते हुए टीम इंडिया को उसी की मांद में धूल चटा दी और इसके साथ ही कोलकाता में पांच दिसंबर से शुरु हो रहे तीसरे टेस्ट के लिए भी अपने हौसले बुलंद कर दिए।