उन्होंने कहा, 'मैं दूसरे टेस्ट में खेलने की पूरी कोशिश कर रहा था और फिजियो भी मुझे मैच के लिए फिट करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, जितना अधिक उन्होंने कोशिश की, सूजन उतनी बढ़ गई और उसमें अधिक दर्द होने लगा। इसलिए, मैंने सोचा कि अगर मैं खेलता हूं तो भी मैं अपना शत प्रतिशत नहीं दे पाऊंगा क्योंकि उस दर्द के साथ खेलना आसान नहीं होता।'
शॉ ने अपने टेस्ट करियर की शानदार शुरुआत करते हुए वेस्ट इंडीज के खिलाफ 2 मैचों की सीरीज की 3 पारियों में 118.20 की औसत से 237 रन बनाए थे। उन्होंने कहा, 'चोट एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। सच कहूं तो आप उसके बारे में कुछ नहीं कर सकते।
ऑस्ट्रेलिया में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खेलने की मेरी इच्छा थी। मुझे वहां बाउंस काफी पसंद है। दुर्भाग्य से, मुझे पैर में चोट लगी। लेकिन ठीक है, मैं बहुत खुश हूं कि भारत ने टेस्ट सीरीज जीती। इससे बेहतर और क्या हो सकता था।'
चोटिल होने के बाद शॉ हालांकि काफी निराश हो गए थे लेकिन साथी खिलाड़ियों का उन्हें पूरा समर्थन मिला। उन्होंने कहा, 'मुझे उस समय पूरी टीम का समर्थन मिला क्योंकि मैं चोट से बहुत निराश था। मैंने दौरे के लिए कड़ा अभ्यास किया था और मेरे दिमाग में कई चीजें थीं जो मुझे लगता था कि मैं वहां करूंगा। यह निराशाजनक था। लेकिन हां, अब मैं खुश हूं कि हमने सीरीज जीती।' इनपुट-भाषा