भारतीय महिला टीम का बांग्लादेश दौरा कई कड़वी यादों के साथ खत्म हुआ। तीन टी20 और इतने ही वनडे मैच खेलने के लिए बांग्लादेश पहुंची टीम इंडिया उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाई और वनडे सीरीज दोनों टीमों के बीच 1-1 से बराबरी पर छूट गई। हालांकि, टी20 सीरीज भारत ने 2-1 से अपने नाम की। भारतीय महिला टीम से उम्मीद की जाती है कि बांग्लादेश जैसी टीम के खिलाफ कोई मैच न हारे, जबकि भारत इस दौरे पर दो मैच हार गया।
मीरपुर में तीसरे वनडे मैच के दौरान अंपायरिंग पर भी जमकर बवाल हुआ और चार भारतीय खिलाड़ी अपने आउट होने के तरीके से नाराज दिखे। उनका मानना था कि उन्हें आउट नहीं दिया जाना था।
वनडे सीरीज के तीसरे मुकाबले में बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 225 रन बनाए। 107 रन बनाने वाली फरगना हक बांग्लादेश के लिए वनडे में शतक लगाने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं। इसके जवाब में भारत ने खराब शुरुआत की और 32 रन पर दो विकेट गंवा दिए। हालांकि, स्मृति मंधाना (59) और हरलीन देयोल (77) ने 107 रन की साझेदारी कर मैच में भारत की वापसी कराई।
भारत का स्कोर 160-3 था और टीम इंडिया जीत की तरफ बढ़ रही थी, तभी नाहिदा अख्तर की गेंद हरमनप्रीत के पैड पर लगी और अंपायर ने उन्हें आउट करार दिया। फैसले से नाखुश कौर ने पवेलियन लौटने से पहले स्टंप पर बैट मारा और स्टंप तोड़ दिए। हालांकि, इसके बाद भी टीम इंडिया ने अच्छा खेल दिखाया और 216/6 रन तक पहुंच गया। यहां से भारत की जीत तय नजर आ रही थी, लेकिन नौ रन के अंदर भारत ने अपने आखिरी चार विकेट गंवा दिए।
बारिश के कारण मैच का काफी समय बर्बाद हुआ था और जब मुकाबला टाई हुआ तो सुपर ओवर के लिए समय नहीं बचा था। ऐसे में मैच का नतीजा नहीं निकला और सीरीज दोनों टीमों के बीच 1-1 से बराबरी पर छूट गई।
हरमनप्रीत भारत की एकमात्र खिलाड़ी नहीं थीं, जो खुद को आउट दिए जाने से नाराज थीं। उनसे पहले यास्तिका भाटिया को सुल्ताना खातून की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट दिया गया था। वह भी इस फैसले से नाखुश थीं। अमनजोत कौर भी खुद को एलबीडब्ल्यू आउट दिए जाने से नाखुश थीं। जब भारत को जीत के लिए चार गेंद में एक रन चाहिए था, तब अंपायर ने मेघना सिंह को कैच आउट करार दिया और मैच टाई हो गया, लेकिन मेघना का मानना था कि गेंद उनके बल्ले से लगी ही नहीं थी।
मैच के बाद हरमनप्रीत कौर ने कहा “जिस प्रकार की अंपायरिंग वहां हो रही थी, हम बहुत आश्चर्यचकित थे। अगली बार जब भी हम बांग्लादेश आएंगे, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें इस तरह की अंपायरिंग से निपटना होगा और उस हिसाब से हमें खुद को तैयार करना होगा। जब दोनों टीमें सीरीज के अंत में ट्रॉफी के साथ फोटो खिंचा रही थीं, तब हरमनप्रीत ने कहा "अंपायरों को भी लाओ"। उन्होंने अंपायरों को बांग्लादेश टीम का हिस्सा होने का संकेत दिया था।
हरमनप्रीत के अंपायरों को बुलाने की बात कहने के बाद बांग्लादेश की कप्तान निगार सुल्ताना अपनी टीम के साथ वापस चली गईं। उन्होंने हरमनप्रीत के फैसले पर कहा “यह पूरी तरह से उनकी समस्या है। मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं है। एक खिलाड़ी के तौर पर वह बेहतर शिष्टाचार दिखा सकती थीं।' मैं आपको नहीं बता सकती कि क्या हुआ, लेकिन मुझे टीम के साथ वहां रहना ठीक नहीं लगा। यह सही माहौल नहीं था। इसलिए हम वापस चले गए। क्रिकेट अनुशासन और सम्मान का खेल है।
निगर सुल्ताना ने अंपयरों का बचाव करते हुए कहा “अगर वह आउट नहीं होती तो अंपायर [मुहम्मद कमरुज्जमां और तनवीर अहमद] उसे आउट नहीं देते… हमने उनके फैसले का सम्मान किया है। अंपायर का निर्णय अंतिम निर्णय होता है, चाहे मुझे यह पसंद हो या नहीं। हमने उस तरह का व्यवहार क्यों नहीं किया?”
भारतीय उपकप्तान स्मृति मंधाना ने अंपायरिंग के बारे में अपना असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा “हम थोड़े बेहतर स्तर की उम्मीद करते हैं। मैं इसे बेहतर तरीके से कहूंगा कि, कुछ निर्णयों के संदर्भ में अंपायरिंग का बेहतर स्तर, क्योंकि कुछ निर्णयों में यह बहुत स्पष्ट था, अगर गेंद पैड पर लगी तो एक बार भी विचार नहीं किया गया। एक सेकंड भी नहीं सोचा और उंगली ऊपर उठ गयी। मुझे यकीन है कि आईसीसी, बीसीबी और बीसीसीआई निश्चित रूप से इस पर चर्चा करेंगे, हो सकता है कि हमारे पास एक तटस्थ अंपायरिंग प्रणाली हो।"
कौर के बारे में पूछे जाने पर मंधाना ने कहा, “बीच में जो हुआ वह खेल का हिस्सा है। हमने अतीत में पुरुष क्रिकेट में ऐसी घटनाएं बहुत देखी हैं। जब आप भारत के लिए खेलते हैं, तो आप मैच जीतना चाहते हैं। यह आवेश में होता है, लेकिन मुझे लगता है कि वह दिए गए निर्णय से वास्तव में खुश नहीं थी। उसे आउट दे दिया गया और उसे लगा कि वह आउट नहीं है। "जब आप इतनी बुरी तरह से जीतना चाहते हैं, तो मुझे लगता है कि खेल की भावना और उन सभी चीजों के बारे में निश्चित रूप से हम बाद में बात कर सकते हैं। लेकिन एक व्यक्ति के रूप में हरमन को जानना, यह जानना कि वह भारत के लिए कितना जीतना चाहती हैं, खेल की भावना से यह [गलत] है। लेकिन हां, जब आप वास्तव में भारत के लिए बोर्ड पर जीत चाहते हैं, तो ये चीजें होती हैं।"
आईसीसी आचार संहिता की धारा 2.7 मैच अधिकारी की "सार्वजनिक आलोचना" या "अंतरराष्ट्रीय मैच में होने वाली घटना" के बारे में "अनुचित टिप्पणी" को लेवल 2 के अपराध के रूप में माना जाता है। धारा 2.8 "अंपायर के निर्णय पर असहमति दिखाना" को समान मानती है। कौर पर उनकी मैच फीस का 75 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया और चार डिमेरिट अंक दिए गए।