ग्रुप चरण में थमा था मेजबान टीम का सफर
चैंपियंस ट्रॉफी का मेजबान पाकिस्तान था, लेकिन भारत ने इस टूर्नामेंट के लिए पड़ोसी देश की यात्रा करने से इन्कार कर दिया था। फाइनल सहित भारत के सभी मुकाबले दुबई में कराए गए थे। पाकिस्तान टीम का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा था और उसका सफर ग्रुप चरण में ही थम गया था। पाकिस्तान इस टूर्नामेंट में खिताब के बचाव के इरादे से उतरी थी।
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पाकिस्तान ने घरेलू मैदान पर खेला सिर्फ एक मैच
पाकिस्तान ग्रुप ए में शामिल था जिसमें भारत, न्यूजीलैंड और बांग्लादेश थे। पाकिस्तान को सबसे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ हार मिली और फिर अगले मैच में भारत ने हराकर उसे टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। बांग्लादेश के खिलाफ उसका मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ा इससे टीम टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं जीत सकी। दिलचस्प बात यह है कि मेजबानी के बावजूद पाकिस्तान अपने घरेलू मैदान पर सिर्फ एक मैच खेल सका क्योंकि भारत के खिलाफ उसका मैच दुबई में हुआ था।
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रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने चैंपियंस ट्रॉफी के लिए रावलपिंडी, लाहौर और कराची में स्टेडियम के नवीनीकरण पर करीब 58 मिलियन डॉलर (करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक) खर्च किए। यह उसके शुरुआती बजट से 50 प्रतिशत अधिक है। इसके बाद पीसीबी ने टूर्नामेंट की तैयारियों पर 40 मिलियन डॉलर (करीब 347 करोड़ रुपये) खर्च किए, लेकिन बदले में उसे मेजबानी फीस के तौर पर सिर्फ छह मिलियन डॉलर (करीब 52 करोड़ रुपये) मिले। टिकट बिक्री और प्रायोजन की बात करें तो आय काफी कम थी। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस कारण पाकिस्तान को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।