फिरोजशाह कोटला का कुख्यात विकेट जहां गेंद कई बार घुटने से भी नीचे रह जा रही है, पर अनुभवी मिथुन मन्हास ने उड़ीसा के गेंदबाजों को जमकर बल्लेबाजी का पाठ पढ़ाया। यह मिथुन ही रहे, जिन्होंने दिल्ली को पहली पारी में उड़ीसा पर 188 रनों की बड़ी बढ़त दिला दी है।
शनिवार को एक समय मुश्किल में पड़ी दिल्ली के मिथुन ने आलराउंडर सुमित नरवाल के साथ मिलकर बेड़ा पार लगाया। वह 161 रन पर नाबाद लौटे। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक उड़ीसा ने दूसरी पारी में बिना किसी नुकसान के सात रन बना लिए हैं।
सुबह मिथुन और मनन ने संभलकर शुरुआत की। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 55 रन जोड़े। मनन 15 रन पर आउट हुए। अगले दो विकेट भी जल्द गिर गए। दिल्ली का स्कोर छह विकेट पर 163 रन था। यहां से मिथुन को नरवाल का साथ मिला। दोनों ने सातवें विकेट के लिए 139 रन की बड़ी साझेदारी की। सुमित ने 95 गेंदों में आठ चौके और एक छक्के की मदद से 66 रन बनाए।
इस दौरान मिथुन ने 164 गेंदों में 17 चौकों से रणजी ट्राफी में 19वां और कुल 21वां शतक भी पूरा किया। दिल्ली की पारी 331 रन पर सिमटी। लेकिन मिथुन आउट नहीं हुए। उन्होंने 161 रनों की पारी 273 गेंदों में 26 चौकों की मदद से खेली। बसंत मोहंती ने 81 पर चार, आलोक मंगराज ने 63 पर तीन और दीपक बेहरा ने 47 रन पर दो विकेट लिए। मिथुन ने स्वीकार किया कि विकेट बल्लेबाजों के लिए अच्छा नहीं है।
खासतौर पर एक समय वह खासे दबाव में आ गए थे, जब उन्हें विकेट पर गेंद डाली जा रही थी। लेकिन सुमित ने आकर उन पर यह दबाव हटाया। उनका लक्ष्य यही था कि वह किसी तरह विकेट पर टिके रहें।