अब खिलाड़ी वाइड और नो गेंद के फैसले को भी चुनौती दे सकेंगे
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आईपीएल और डब्ल्यूपीएल में अब खिलाड़ियों के पास वाइड और नो बॉल के फैसलों को भी रिव्यू करने का अधिकार होगा। महिल प्रीमियर लीग में यह नियम पहले सीजन से ही है, जबकि आईपीएल में आगामी सीजन से खिलाड़ियों के पास यह अधिकार होगा। महिल प्रीमियर लीग में गुजरात और यूपी के मुकाबले में यूपी की टीम ने इस अधिकार का उपयोग कर रोमांचक जीत हासिल की।
गुजरात और यूपी के मैच में आखिरी ओवर में यूपी ने वाइड बॉल के एक फैसले को चुनौती दी। रिव्यू में यह गेंद वाइड पाई गई, जबकि अंपायर ने इसे सही गेंद मान्य किया था। इसके बाद यूपी को एक अतिरिक्त गेंद मिली और एक रन भी मिल गया। इसकी मदद से यूपी ने मैच अपने नाम किया।
पुराने नियमों के अनुसार खिलाड़ी सिर्फ आउट और नॉट आउट के फैसले को ही रिव्यू कर सकते थे, लेकिन अब वाइड और नो बॉल को भी इसमें शामिल किया गया है। हालांकि, हर टीम के पास दो ही रिव्यू होंगे और अगर कोई टीम दो बार अंपायर के फैसले को असफल चुनौती देती है तो उसके पास आगे कोई रिव्यू नहीं होंगे।
महिला प्रीमियर लीग के पहले दो मैच में खिलाड़ी पहले ही इस नए नियम का उपयोग कर चुके हैं। मुंबई इंडियंस और गुजरात जायंट्स के बीच टूर्नामेंट के पहले मैच में, मुंबई की स्पिनर सायका इशाक की एक गेंद को मैदानी अंपायर ने लेग साइड से वाइड करार दिया। मुंबई ने डीआरएस का उपयोग करते हुए फैसले की समीक्षा की और इसे पलट दिया गया, क्योंकि रीप्ले से पता चला कि गेंद बल्लेबाज मोनिका पटेल के ग्लव्स पर लगी थी।
दिल्ली और आरसीबी के मैच में दिल्ली कैपिटल्स की बल्लेबाज जेमिमा रोड्रिग्स ने भी इस तरह का रिव्यू लिया। ऑन-फील्ड अंपायरों ने ऊंचाई के लिए नो-बॉल का संकेत नहीं दिया था, रोड्रिग्स ने डीआरएस का उपयोग किया। हालांकि, यह निर्णय पलटा नहीं गया था क्योंकि रिप्ले और बॉल-ट्रैकिंग से पता चला था कि गेंद बल्लेबाज की कमर के नीचे जा रही थी और रोड्रिग्स भी काफी हद तक झुकी हुई थी। वह लगभग उनके पिछले घुटने पर थीं।
बल्लेबाज की कमर से ऊपर की नो बॉल के फैसलों पर पिछले कुछ समय में जमकर विवाद हुए हैं। चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान एमएस धोनी एक बार 2019 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ एक मैच में मैदान पर आ गए थे, जब बेन स्टोक्स की एक फुल टॉस गेंद बल्लेबाज की कमर से उपर थी। अंपायर उल्हास गंधे ने पहले ऊंचाई के लिए नो-बॉल का संकेत दिया। हालांकि, स्क्वायर-लेग अंपायर ब्रूस ऑक्सेनफोर्ड ने उन्हें फैसला बजलने के लिए कहा। इसके कारण मैदान पर गरमागरम बहस हुई, जिसमें बल्लेबाज रवींद्र जडेजा और मिचेल सेंटनर शामिल थे। इसके बाद धोनी भी अंपायरों के साथ इस मामले पर चर्चा करने के लिए मैदान पर उतरे।
पिछले साल रॉयल्स से जुड़े एक और मैच में आखिरी ओवर में ऐसी ही घटना हुई थी। रोवमैन पॉवेल ने ओबेड मैककॉय की फुल टॉस गेंद पर छक्का लगाया था, लेकिन अंपायर ने इसे नो गेंद नहीं करार दिया था। दिल्ली कैपिटल्स के बल्लेबाजों ने ऑन-फील्ड अंपायरों के साथ चर्चा की। इसके बाद टीम के कप्तान ऋषभ पंत ने सहायर कोच प्रवीण आमरे को अंदर जाकर अंपायरों से बात करने के लिए कहा था।