स्पॉट फिक्सिंग मामले से दागदार हुई बीसीसीआई ने अब आईपीएल में फैली गंदगी को दूर करने के लिए ‘आपरेशन क्लीन अप’ तैयार किया है।
बोर्ड का कार्यभार संभाल रहे जगमोहन डालमिया की मानें तो इस आपरेशन का ब्ल्यू प्रिंट तैयार कर लिया गया है।
अगली कार्य समिति की बैठक में इसे अमली जामा पहना दिया जाएगा। अगले आईपीएल में अब न तो चीयर लीडर्स होंगी और न ही खिलाड़ी डग आउट में ईयर प्लग्स या माइक्रोफोंस का इस्तेमाल कर पाएंगे।
यहां तक खिलाड़ियों के पास मौजूद मोबाइल फोन को स्टेडियम में जैमर के जरिए जाम कर दिया जाएगा।
डालमिया ने सोमवार को कार्य समिति की बैठक के बाद आपरेशन क्लीन की घोषणा की। इसके तहत खिलाड़ियों के साथ सपोर्ट स्टाफ व फ्रेंचाइजी पर पूरी तरह लगाम कसने का खाका खीचा गया है। अब फ्रेंचाइजी को खिलाड़ियों व सपोर्ट स्टाफ के साथ किए गए भुगतान और अनुबंध का खुलासा बोर्ड से करना होगा।
साथ ही खिलाड़ियों को किसी भी संस्था या व्यक्ति के साथ किए गए आर्थिक लेन देन का ब्योरा बोर्ड को देना होगा। खिलाड़ियों के लिए जल्द ही सुरक्षा कंट्रोल पॉलिसी तैयार की जाएगी। जिसका पालन करना अनिवार्य होगा।
मैच के दौरान होने वाली कप्तान मीटिंग के लिए भी अलग से ब्ल्यू प्रिंट तैयार किया जाएगा। यह बैठक अब ज्यादा सुझाव वाली होगी। मैच के दौरान मैदान व टीम होटल में बोर्ड की एंटी करप्शन यूनिट के सदस्य मौजूद रहेंगे। उनकी निगाह हर संदिग्ध पर होगी।
साथ ही अब सभी खिलाड़ियों व सपोर्ट स्टाफ को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले अपने फोन नंबरों की जानकारी बोर्ड को देनी होगी। यही नहीं बोर्ड के राष्ट्रीय चयनकर्ता अब किसी भी आईपीएल फ्रेंचाइजी के साथ नहीं जुड़ सकेंगे।
स्ट्रैटजिक टाइम आउट पर फैसला नहीं
आईपीएल को अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के टी-20 टूर्नामेंट की तर्ज पर कराने का प्रस्ताव देते हुए डालमिया ने कहा कि इससे इस टूर्नामेंट को भ्रष्टाचार से मुक्त करने में मदद मिलेगी। हालांकि मैच के दौरान दो बार होने वाले स्ट्रैटजिक टाइम आउट पर डालमिया कोई फैसला नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि स्ट्रैटजिक टाइमआउट का मामला वित्तीय मुद्दे से जुड़ा हुआ है। हम इस पर आगे विचार विमर्श करेंगे।
पहले भी प्रतिबंधित थी पार्टियां
जगमोहन डालमिया ने घोषणा की कि चीयर लीडर्स के साथ मैच के बाद होने वाली देर रात की पार्टियों पर प्रतिबंध लगेगा। लेकिन डालमिया को जब यह याद दिलाया गया कि यह पार्टियां तो बोर्ड ने पहले ही प्रतिबंधित कर दी थीं।
बावजूद इसके टीम मालिकों की ओर से इनका आयोजन खुले आम किया जा रहा था। इस पर डालमिया सही जवाब नहीं दे सके। उन्होंने इतना ही कहा कि टीम मालिकों से इस बारे में बात की जाएगी। पुलिस की जांच के दौरान संदिग्ध करार दिए गए टाइम आउट को भी खत्म करने पर निर्णय नहीं लिया गया।
धोनी का मामला बंद नहीं
भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के हितों के टकराव मामले पर डालमिया ने कहा कि हमने अपनी आंखें बंद नहीं कर रखी हैं। कोई भी फैसला तमाम चीजों को देखने के बाद ही किया जाएगा। लेकिन अभी भारतीय टीम इंग्लैंड में चैंपियंस ट्रॉफी खेल रही है। हम टूर्नामेंट में कोई बाधा नहीं डालना चाहते। हम इस मामले को देख रहे हैं और जो सही फैसला होगा वह सबके सामने रखा जाएगा।
प्रस्ताव के मुख्य बिंदू
*खिलाड़ियों के डगआउट और ड्रेसिंग रूम के आसपास किसी भी अधिकारी का मूवमेंट रोका जाएगा और इसमें फ्रेंचाइजी मालिक भी शामिल होंगे।
*खिलाड़ियों के सेलफोन मैच से पहले ले लिए जाएंगे। खिलाड़ियों को अपने नंबर बीसीसीआई को देने होंगे।
*खिलाड़ियों को अपने वित्तीय हितों को बीसीसीआई को बताना होगा ताकि बोर्ड को पता रहे कि वे कहीं से आचार संहिता का उल्लंघन तो नहीं कर रहे।
*फ्रेंचाइजी मालिकों को भी यह बताना होगा कि वे खिलाड़ियों और अन्य स्टाफ को जो पैसा दे रहे हैं उसका स्रोत क्या है।
*मैदान में मैचों के दौरान खिलाड़ियों को ईयर प्लग का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी।
*यह भी प्रस्ताव है कि राष्ट्रीय चयनकर्ता किसी फ्रेंचाइजी के साथ नहीं जुड़ेंगे ताकि वे निष्पक्ष रह सकें।