भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि उन्होंने देश के लिए खेलने के बारे में कभी नहीं सोचा था और छोटे शहर के साथ संबंध ने उन्हें बेहद मजबूत खिलाड़ी बनने में मदद की है। धोनी ने यहां एक परिचर्चा में कहा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं देश के लिए खेलूंगा। मुझे कभी इस बात की चिंता नहीं रहती है कि मैं किसी मैच या सीरीज के लिए चुना जाऊंगा या नहीं।
मेरा ध्यान हमेशा अगले मैच में अपना सौ फीसदी योगदान देने पर लगा रहता था। अन्य शहरों की तुलना में रांची में सीनियर खिलाड़ियों की अच्छी तादाद है। किसी छोटे शहर से आकर बड़ी लीग में खेलना आसान नहीं है लेकिन ये चुनौतियां आपको और मजबूत बनाती हैं।’
यह पूछने पर कि खेल के व्यस्त कार्यक्रम के बीच वह दूसरे आयोजनों जैसे विज्ञापन के लिए समय कैसे निकालते हैं। भारतीय कप्तान ने कहा कि सभी गतिविधियों का केंद्र खेल ही है। उन्होंने कहा, ‘यह सिंपल फंडा है कि सबकुछ क्रिकेट के इर्दगिर्द है। अगर क्रिकेट नहीं है तो बाकी कुछ नहीं है।’
साथ ही धोनी ने कहा कि उन्हें खाने से बहुत लगाव है। उन्होंने कहा कि मैं खाने से कोई समझौता नहीं कर सकता हूं। मैं जिम में ज्यादा समय बिताने के बजाए आराम करता हूं और मनचाहा भोजन करता हूं। इस परिचर्चा में वीरेंद्र सहवाग, पूर्व कप्तान अनिल कुंबले और भारत के पूर्व कोच जॉन राइट ने भी हिस्सा लिया।
शुरुआती दिनों में किया बहुत संघर्ष: वीरू
ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष किया। अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए सहवाग ने कहा, ‘मैं नजफगढ़ में अभ्यास करता था और तब नजफगढ़ की पहचान बदमाशों के अड्डे के रूप में हुआ करती थी।’
सहवाग ने कहा कि उन्हें फुर्सत के क्षणों में परिवार के साथ वक्त बिताना और संगीत सुनना पसंद है। साथ ही उन्होंने कहा कि मेरी बल्लेबाजी तकनीकी रूप से मजबूत नहीं है लेकिन मैं मानसिक रूप से बहुत मजबूत हूं।