भारतीय क्रिकेट को ढेरों बेमिसाल क्रिकेटर देने वाली मुंबई की टीम एक बार फिर फाइनल में पहुंच गई है और 4 साल बाद एक बार फिर रणजी ट्रॉफी में इतिहास दोहराया जाएगा। इस बार बड़े क्रिकेटरों से सजी सौराष्ट्र की टीम को मुंबई से बदला लेने का शानदार मौका भी होगा।
खैर, रणजी ट्रॉफी के इस सत्र के लिए खिताबी जंग में दो टीमों के पहुंचने के साथ ही टूर्नामेंट के अब तक के सफर में कुछ बेहद दिलचस्प फैक्ट्स भी हुए हैं जिसमें 8 चुनिंदा बातें आपको बताने जा रहे हैं।
रणजी में महाराष्ट्र से अलग मुंबई की टीम एक दूसरी टीम के रूप मे खेलती है और अब तक वह 82 में से रिकॉर्ड 45 बार फाइनल में पहुंची है जिसमें वह 40 बार चैंपियन भी बनी है। इन 40 बार में वह 32 बार बंबई टीम के रूप में तो 4 बार मुंबई के नाम से खिताब अपने नाम किया।
दिलचस्प यह है कि इस टीम को जिन 4 फाइनल में हार मिली है उस समय टीम का नाम बंबई था। साथ ही मुंबई ने 1990-91 के बाद से 10 फाइनल खेले हैं और एक मैच भी नहीं हारे।
एक सत्र में बिना शतक के ही बना दिए 500 रन
सौराष्ट्र की टीम रणजी ट्रॉफी के फाइनल में दूसरी बार पहुंची है। इससे पहले वह 2012-13 में पहली बार फाइनल में पहुंची थी जिसमें उसे मुंबई की टीम ने एक पारी और 125 रन से हरा दिया था। यह टीम पिछले 4 सालों में दूसरी बार खिताबी जंग में शामिल हुई है।
इस सत्र में मुंबई के बल्लेबाज श्रेयस अय्यर ने 10 बार 50 या उससे ज्यादा का स्कोर किया है जो किसी सत्र में किसी भी बल्लेबाज का संयुक्त रूप से दूसरा सबसे शानदार प्रदर्शन भी है। इससे पहले कर्नाटक के विजय भारद्वाज (1998-99) और मुंबई के अभिषेक नायर (2012-13) ने 11-11 बार 50 से ज्यादा का स्कोर किया था। फाइनल में उनके पास इस रिकॉर्ड को तोड़ने का मौका होगा।
साथ ही श्रेयस अय्यर (1204) एक सत्र में 1200 से ज्यादा रन बनाने वाले पांचवें बल्लेबाज हो गए हैं। वीवीएस लक्ष्मण ने एक सत्र (1999-00) में 1415 रन बनाए हैं। अय्यर से पहले वसीम जाफर ने मुंबई के लिए एक सत्र में सबसे ज्यादा 1260 रन बनाए थे।
सत्र में सिर्फ 2 गेंदबाज ही ऐसे हैं जिन्होंने इस बार 50 या उससे ज्यादा विकेट लिए हैं। आसाम के कृष्णा दास और झारखंड के शाहबाज नदीम सबसे सफल गेंदबाज रहे। शहबाज ने क्वार्टर फाइनल में ही 50 विकेट झटक लिए थे।
आसाम के अमित वर्मा एक भी शतक के बगैर इस सत्र में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हो गए हैं। सेमीफाइनल में सिर्फ 2 रन से शतक से चूकने वाले 98 रनों की पारी खेलने वाले अमित ने 502 रन बनाए। वहीं मध्यप्रदेश के विकेटकीपर-बल्लेबाज नमन ओझा ने सेमीफाइनल में शतक लगा दिए वरना वह एक सत्र में बिना शतक से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में आगे चल रहे थे। उन्होंने एक शतक लगाए बगैर 633 रन बनाए थे।
मुंबई के विकेटकीपर आदित्य तारे ने इस सत्र में 41 शिकार किए हैं। जबकि एक सत्र में सबसे ज्यादा शिकार का रिकॉर्ड 2014-15 में आंध्र विकेटकीपर श्रीकार भारत ने 46 शिकार किए थे।
दो धुंआधार शतक के बाद भी लक्ष्य के करीब नहीं पहुंच सकी टीम
कटक में खेले गए दूसरे सेमीफाइनल मैच में विकेटकीपर बल्लेबाज नमन ओझा (113) और हरप्रीत सिंह (105) के शतकीय प्रहार के बावजूद मध्यप्रदेश बड़े लक्ष्य से काफी पीछे रह गया और 40 बार की चैंपियन मुंबई पहली पारी में बढ़त के आधार पर फाइनल में प्रवेश कर गई जहां उसका सामना 24 फरवरी को पुणे में सौराष्ट्र से होगा।
मध्यप्रदेश के सामने 571 रनों का विशाल लक्ष्य था और अप्रत्याशित परिणाम हासिल करने के लिए उसे आखिरी दिन 90 ओवरों में 472 रन बनाने थे। मध्यप्रदेश ने बुधवार सुबह दो विकेट पर 99 रन से आगे खेलना शुरू किया। कल के नाबाद लौटे बल्लेबाज अंकित श्रीवास्तव (68) जल्दी आउट हो गए लेकिन इसके बाद नमन ओझा और हरप्रीत ने चौथे विकेट के लिए 159 रनों की साझेदारी कर टीम को संकट से उबारने के भरसक प्रयास किए लेकिन उनकी टीम पांच विकेट पर 361 रन ही बना सकी।
इसके बाद कोई परिणाम नहीं निकलता देख दोनों कप्तानों की सहमति से मैच ड्रॉ समाप्त कर दिया गया। मुंबई ने पहली पारी में 371 रन बनाए थे। इसके जवाब में मध्यप्रदेश की टीम 227 रन पर ढेर हो गई थी। मुंबई ने दूसरी पारी में 426 रन बनाए थे। ओझा ने अपनी शतकीय पारी के दौरान 185 गेंदों पर 13 चौके और एक छक्का लगाया जबकि हरप्रीत ने 189 गेंदों पर 11 चौके और एक छक्का जड़ा।
इससे पहले, मुंबई और सौराष्ट्र की टीमें 2012-13 के खिताबी भिड़ंत में आमने-सामने थीं। उस समय मुंबई चैंपियन बनी थी। सौराष्ट्र के पास मुंबई से पिछली हार का बदला लेने का बेहतरीन मौका होगा।