आदित्य तारे (71) और सिद्धेश लाड (48) की बदौलत मुंबई ने दिल्ली को चार विकेट से हराकर तीसरी बार विजय हजारे ट्रॉफी का खिताब जीत लिया। इससे पहले मुंबई की टीम ने 2003-04 और 2006-07 में खिताब जीता था।
टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करते हुए मुंबई के गेंदबाजों शिवम दूबे (3/29) और धवल कुलकर्णी (3/30) ने दिल्ली को 45.4 ओवरों में 177 रन पर ढेर कर दिया। मुंबई ने 40 रन पर चार विकेट गंवा दिए थे, जिसमें पृथ्वी शॉ (08) का विकेट भी शामिल था, जिन्होंने नवदीप सैनी की पहली दो गेंदों पर लगातार दो चौके जड़े थे।
अजिंक्य रहाणे (10), कप्तान श्रेयस अय्यर (07) और सूर्यकुमार यादव (04) भी नहीं चल सके थे, लेकिन उसके बाद तारे और सिद्धेश लाड ने पांचवें विकेट पर 105 रन की साझेदारी कर 15 ओवर पहले मुंबई को जीत दिला दी।
तारे के खिलाफ 19वें ओवर में विकेट के पीछे लपके जाने की अपील हुई थी। टीवी रिप्ले में लगा कि गेंद विकेटकीपर उन्मुक्त चंद के ग्लव्स में जाने से पहले जमीन पर लग गई थी। तारे 31 वें ओवर में आउट हुए, लेकिन तब तक मुंबई की टीम जीत की राह पर आ गई थी। तारे की 89 गेंदों की पारी में 13 चौके और एक छक्का शामिल था। जबकि लाड ने 68 गेंदों की अपनी पारी में चार चौके और दो छक्के लगाए।
इससे पहले 2012-13 की चैंपियन दिल्ली को दूसरी बार उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा। इससे पहले 2015-16 में भी दिल्ली की टीम फाइनल में पहुंची थी लेकिन गुजरात से हार गई थी। दिल्ली की टीम ने कप्तान गौतम गंभीर सहित तीन विकेट 21 रन पर गंवा दिए थे। हिम्मत सिंह ने सर्वाधिक 41 रन बनाए। सेमीफाइनल के नायक पवन नेगी (21) चोटिल होकर रिटायर्ड हर्ट हो गए। सुबोध भाटी (25) ने तीन छक्के जड़े।