पहले टेस्ट शतक के बाद महेंद्र सिंह धोनी
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धोनी भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हों लेकिन उनकी छाप मैदान पर हमेशा रहेगी। धोनी ने अपनी करियर में कुछ ऐसी बुलंदियों को छुआ जो शायद कोई सोच भी नहीं सकता था। साल 2007 में धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने पहला टी20 विश्व कप अपने नाम किया। चार साल बाद 2011 में वनडे विश्व कप में भारत का झंडा लहराया और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती। धोनी ऐसे पहले कप्तान थे जिन्होंने क्रिकेट में तीन अलग-अलग आईसीसी ट्रॉफी जीती हैं। एक महान कप्तान होने के साथ-साथ धोनी ने भारत के लिए फिनिशर की भूमिका को बखूबी निभाया था। अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही धोनी ने दिखा दिया था कि उनके पास लंबे छक्के लगाने और लंबी पारी खेलने, दोनों की काबीलियत है।
पाकिस्तान के खिलाफ धोनी ने टेस्ट में अपना पहला शतक लगाया था। पाकिस्तान ने पहली पारी में 588 रन का बड़ा स्कोर बनाया था। उस मैच मे इंजमाम-उल-हक और शाहिद अफ्रीदी ने शतकीय पारी खेली थी। धोनी ने इरफान पठान के साथ छठे विकेट के लिए शानदार साझेदारी बनाते हुए अपना पहला टेस्ट शतक जड़ा था। दुर्भाग्य से धोनी दानिश कनेरिया की गेंद पर 148 रन पर आउट हो गए थे। वीवीएस लक्ष्मण ने बताया की किस तरह धोनी ने ड्रेसिंग रुम में वापस आते ही मजाक में अपने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की बात कही थी।
लक्ष्मण ने बताया "मुझे आज भी याद है जब धोनी शतक लगाकर वापस ड्रेसिंग रुम में आए थे और उन्होंने जोर से चिल्लाया था कि अब मैं अपने संन्यास की घोषणा कर दूंगा, मैं शतक मारा टेस्ट क्रिकेट में, बस यार। मुझे अब टेस्ट क्रिकेट से और कुछ नहीं चाहिए।" हम सभी यह सुनकर बहुत हैरान हो गए थे पर यही उन्हें धोनी बनाता है।
धोनी की शतकीय पारी के बावजूद भारत वह मैच जीत नहीं पाया था, लेकिन उनकी उस पारी की बदौलत भारत मैच को ड्रा कराने में सफल रहा था। हालांकि, धोनी इसके बाद भी भारत के लिए कई मैच खेले और टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए दोहरा शतक लगाने का कारनामा भी किया।