नए साल की शुरुआत में लगातार 4 मैचों में हार के बाद टीम इंडिया ने वनडे में पहली जीत का स्वाद चखा। वैसे साल 2015 में भी भारत का रिकॉर्ड वनडे में कुछ खास नहीं रहा था। भारत को पिछले साल के मध्य में धोनी की अगुवाई में बांग्लादेश के हाथों पहली बार कोई सीरीज (वनडे) गंवानी पड़ी। फिर साल के अंत में टीम इंडिया दक्षिण अफ्रीका के हाथों घरेलू वनडे सीरीज गंवा बैठी।
भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान धोनी के लिए बतौर कप्तान पिछले कुछ समय से बढ़िया नहीं रहे हैं। साथ ही वह बल्ले से लगातार संघर्ष भी करते दिख रहे हैं। अब जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 मैचों की वनडे सीरीज खत्म हो गई है और उसमें भी भारत का प्रदर्शन जीत के लिहाज से सही नहीं रहा। पर्थ, ब्रिसबेन, मेलबर्न और कैनबरा में हार के बाद सिडनी में मिली जीत ने भारत का सूपड़ा साफ होने से बचा लिया।
धोनी ने सिडनी वनडे में 34 रनों की पारी खेलकर बल्ले से कुछ रन जरूर बनाए लेकिन उनका संघर्ष फिर भी दिखा। मैच के अंतिम ओवर की पहली गेंद पर छक्का मारने के बाद वह कैच आउट हो गए। अपनी पारी में उन्होंने 42 गेंदों में एक चौका और एक छक्का जड़ा था। लेकिन एक समय वह 21 गेंदों पर 7 रन बनाकर खेल रहे थे।
तो क्या यह जीत 34 साल के धोनी की अगुवाई में भारत की अंतिम जीत है? साथ ही यह कहीं यह उनके वनडे करियर का अंतिम वनडे मैच तो नहीं हो जाएगा?
सालभर वनडे से दूर रहेगी टीम इंडिया
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सिडनी वनडे में 42 रनों की पारी खेली लेकिन उनके छक्के ने टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचा दिया और इसके बाद में मनीष पांडे ने टीम को जीत दिला दिया। वनडे सीरीज के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही 3 मैचों की टी-20 सीरीज खेली जानी है।
इस सीरीज के बाद टीम इंडिया अपने घर में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप की तैयारियों में जुट जाएगी। 20-20 ओवर के इस महाकुंभ से पहले भारत श्रीलंका से 3 मैचों की टी-20 सीरीज भी खेलेगा। इसके बाद वर्ल्ड कप ही शुरू हो जाएगा। फिर आईपीएल लगभग डेढ़ महीने चलेगा।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज के बाद भारत को इस साल एक भी 50-50 ओवर के मुकाबले नहीं खेले जाने हैं। टी-20 वर्ल्ड कप के बाद टीम इंडिया को विराट कोहली की अगुवाई में ढेरों टेस्ट मैच खेलने हैं। ऐसे में धोनी की कप्तानी में भारत के वनडे मैचों में खेलने की संभावना कम ही दिखती है।
दूसरी ओर, धोनी की जगह कोहली को वनडे टीम का भी कप्तान बनाए जाने की बात उठने लगी है। ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व कप्तान इयान चैपल का भी मानना है कि धोनी भारत की वनडे टीम के कप्तान जरूरत से ज्यादा दिनों तक रह गए हैं और इसका टीम पर विपरीत असर पड़ रहा।
'लंबे समय तक कप्तान बने रहे तो टीम को होता है नुकसान'
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान इयान चैपल का मानना है कि धोनी टीम इंडिया के वनडे कप्तान के रूप में जरूरत से ज्यादा दिनों तक बने रह गए हैं। इसका भारतीय टीम पर विपरीत प्रभाव भी पड़ रहा है।
चैपल ने क्रिकइन्फो में लिखे अपने कालम में लिखा है कि कप्तानों का प्रभाव कुछ निश्चित समय तक होता है जिसके बाद टीम के प्रदर्शन पर उनका प्रभाव खत्म हो जाता है और उनकी उपस्थिति से टीम को नुकसान पहुंचता है। धोनी इस स्थिति में कुछ समय पहले पहुंच चुके थे। वर्तमान भारतीय टीम को नए विचारों और उत्साह की जरूरत है जब विरोधी चार पारियों में लगभग 1300 रन बना रही हो इसके लिए केवल सपाट विकेटों और लचर गेंदबाजों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने लिखा कि मनुका ओवल में जहां उन्होंने रविंद्र जडेजा को मैक्सवेल पर हावी होने को कहा, उसको छोड़कर धोनी बाकी गेंदबाजों को प्रेरित नहीं कर पाए। यह सही है कि भारतीय गेंदबाज अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए लेकिन वे क्षेत्ररक्षण की सजावट से भी प्रेरित नहीं थे।
चैपल का मानना है कि टेस्ट कप्तान विराट कोहली टीम में नया जोश ला सकते हैं, जैसा कि वह लंबी अवधि के प्रारूप में साबित कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि भारत के पास विकल्प नहीं है। कोहली ने अपने आपको आक्रामक कप्तान साबित कर दिया है। वह बल्लेबाजी में भी शानदार फार्म में हैं। चैपल ने कहा कि जब धोनी ने शुरुआत की थी तब वह हर प्रारूप में चतुर कप्तान थे। उन्हें खूब सफलताएं भी मिलीं लेकिन जब कोई कप्तान समय से अधिक अपने पद पर बना रहता है तो इसका टीम पर गलत प्रभाव पड़ता है।