भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी मैदान पर नए-नए तरह के प्रयोग के लिए मशहूर हैं। विकेटकीपिंग छोड़कर गेंदबाजी करना, पुछल्ले बल्लेबाजों को बतौर ओपनर भेजना, सीनियर्स को बाहर बिठाकर युवाओं पर भरोसा करना, पार्टटाइम गेंदबाजों पर भरोसा करना और फील्डिंग के दौरान रणनीति में बदलाव करना इत्यादि उनकी खासियतों में हैं।
धोनी ने ठीक ऐसा ही अनोखा प्रयोग यॉर्कशायर के खिलाफ चैंपियंस लीग के मुकाबले में किया। इस मैच में उन्होंने खुद की जगह सुरेश रैना को चेन्नई सुपर किंग्स की कप्तानी करने का मौका दिया। हालांकि चेन्नई पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है और यह मैच उनके लिए औपचारिक से ज्यादा कुछ नहीं था। फिर भी सवाल उठता है कि बतौर कप्तान रैना को इस मैच में उतारना यह उनका नया प्रयोग है या फिर चेन्नई सुपर किंग्स के नए कप्तान की तलाश। इस सवाल का जवाब खुद धोनी ही दे सकते हैं।
धोनी सुपर किंग्स के लिए पहली बार बतौर गैर-कप्तान मैदान पर उतरे और विकेटकीपिंग भी नहीं की। ऐसे में कार्यवाहक कप्तान रैना भी धोनी को गेंदबाजी में आजमाने से नहीं चूके। 15वें ओवर में रैना ने जब धोनी को गेंद थमाई तब यॉर्कशायर का स्कोर तीन विकेट पर 88 रन था। लेकिन धोनी के औसतन 112 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से फेंकी गई गेंद पर जीएस बैलेंस ने लगातार दो छक्के जड़ यॉर्कशायर की रनगति को 6.28 से 7.05 के करीब पहुंचा दिया।
धोनी के दो ओवर में यॉर्कशायर के बल्लेबाजों ने 25 रन कूटे। रैना ने गेंद से न केवल धोनी बल्कि खुद को भी आजमाया। रैना ने एक ओवर में12 रन लुटाए। वहीं, रविंद्र जडेजा सबसे महंगे साबित हुए। उन्होंने एक ओवर में 15 रन खर्च किए। रैना इससे पहले 9 अंतरराष्ट्रीय वन-डे मैचों में कप्तानी कर चुके हैं। 6 जून 2011 को पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्ट इंडीज के खिलाफ 43 रन बतौर कप्तान उनका सर्वाधिक स्कोर है। यॉर्कशायर के खिलाफ उन्होंने 30 गेंदों में 31 रन की पारी खेली। हालांकि रैना यह मैच जीतने में कामयाब रहे लेकिन उनकी इस जीत में एस बद्रीनाथ (47) का अहम योगदान रहा।