अभी नवंबर के महीने की ही बात है जब धोनी पर एक के बाद एक कई जरूरी बयान सामने आए। विराट कोहली ने कहा- धोनी खुद संन्यास पर फैसला लेंगे। फिर बोर्ड के नए अध्यक्ष सौरव गांगुली ने एक रोज कहा कि वो महेंद्र सिंह धोनी से उनके भविष्य पर बात करेंगे। कोच रवि शास्त्री ने कहा- 2020 IPL में धोनी के प्रदर्शन तक का इंतजार कीजिए। चीफ सेलेक्टर एमएसके प्रसाद ने कह दिया कि टीम इंडिया अब धोनी से आगे की सोच रही है। और तो और एक रोज धोनी ने भी कहा- जनवरी तक इंतजार करो। सौरव गांगुली ने इस बीच एक और बड़ा बयान नवंबर के आखिरी हफ्ते में दिया। उन्होंने कहा- वो धोनी का भविष्य जानते हैं, लेकिन बताने पर बवाल हो जाएगा। आपको बता दें कि पिछले करीब 6 महीने में धोनी ने वेस्टइंडीज दौरा, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज, बांग्लादेश के खिलाफ टी-20 सीरीज, श्रीलंका के खिलाफ टी-20 छोड़ी है। इन बयानों से अलग पिछले दिनों धोनी को अपनी फिटनेस पर काम करते भी देखा गया था। धोनी कभी टेनिस खेलते तो कभी रांची में अंडर 23 टीम के साथ नेट्स में भी बल्लेबाजी करते दिखे हैं।
क्रिकेट फैंस को टेस्ट क्रिकेट से धोनी का संन्यास याद है। वो साथ 2014। जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी। इसी दौरे पर अचानक एक दिन महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने का एलान कर दिया। इसके बाद धोनी के वन-डे टीम की कप्तानी छोडने की प्रक्रिया भी कुछ ऐसी ही थी। धोनी ने खुद ये ऑफर रखा था कि विराट कोहली को वन-डे टीम की भी कप्तानी सौंप देनी चाहिए। ये सलाह देने के साथ साथ बड़ी बात ये थी कि धोनी विराट की कप्तानी में खेलने के लिए भी तैयार थे।
ये दो फैसले इस बात को साबित करते हैं कि धोनी टीम पर बोझ बनकर नहीं रह सकते। धोनी के करीबी हमेशा कहते थे कि जिस दिन उन्हें लगेगा कि वो टीम में किसी यंगस्टर का रास्ता रोक रहे हैं तो वो मैदान छोड़ देंगे, लेकिन अब ये सोच भ्रम के साए में घिर रही है। धोनी को अब यंगिस्तान की फिक्र नहीं रही। धोनी 38 साल के हो चुके हैं। 2019 विश्वकप में उनकी बल्लेबाजी की बहुत आलोचना भी हुई। विश्व कप सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ जब वो बैटिंग ऑर्डर में ऊपर नहीं आए तो ये सवाल उठा कि क्या अब धोनी बड़ी जिम्मेदारी से बचना चाह रहे हैं।
उस वक्त ये सवाल गौतम गंभीर जैसे साथी क्रिकेटर ने भी उठाए थे। सौ की सीधी बात ये है कि धोनी को लेकर गावस्कर की जो नाराजगी है वो गलत नहीं। क्योंकि टीम चुनना भले ही सेलेक्टर्स का काम है, संन्यास का फैसला धोनी को खुद लेना चाहिए। माही को सालाना कॉन्ट्रैक्ट से बाहर करने के बाद बीसीसीआई की ओर से सफाई भी आ गई। कहा गया कि धोनी से बातचीत कर बता दिया गया कि उन्होंने सितंबर 2019 से कोई मैच नहीं खेला है, इसलिए फिलहाल वो कॉन्ट्रैक्ट में नहीं हैं।
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