30 साल बाद पहली बार 5 मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने जब टीम इंडिया इंग्लैंड के लिए रवाना हुई थी तो सभी को उम्मीद थी कि भारत इस बार पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन करेगा। लेकिन पहले 2 मैचों के बाद भारतीय टीम सीरीज में 1-0 से आगे थी लेकिन इसके बाद टीम के खेल का स्तर इस कदर गिरता चला गया कि जब सीरीज खत्म हुआ तो भारत 1-3 से हार गया।
विदेशी धरती पर एक के बाद एक हार के बावजूद महेंद्र सिंह धोनी बीसीसीआई के आकाओं से अच्छे संबंध होने के कारण कप्तानी पद बचाने में कामयाब रहे थे लेकिन इस दौरान इसका खमियाजा टीम को भुगतना पड़ता रहा।
2 साल पहले धोनी ने कहा था कि वह 2013 के मध्य तक टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे लेकिन टेस्ट क्रिकेट छोड़ने को कौन कहे, अब 2014 के अगस्त तक टीम इंडिया की टेस्ट टीम के कप्तान पद पर काबिज बने हुए हैं। अब भारत ने धोनी की कप्तानी में ही इंग्लैंड में करारी हार के साथ ही एक और टेस्ट सीरीज गंवा दी है। ऐसे में अब धोनी ने संन्यास लेने के कुछ संकेत दिए हैं, लेकिन एक शर्त भी रख दी है।
'पहले तय हो जाए हार की जिम्मेदारी किसकी'
भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने इंग्लैंड में मिली शर्मनाक हार के बाद कप्तानी छोड़ने के संकेत दे दिए हैं।
मैच के बाद धोनी से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था, "शायद हां। हालांकि आपको इसके लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि पहले यह तय हो जाए कि इस बड़ी हार के लिए मैं जिम्मेदार हूं या नहीं।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारी बल्लेबाजी सीरीज में बेहद खराब रही। मुरली विजय ने सीरीज में हालांकि शुरुआत अच्छी की थी लेकिन पहले मैच के बाद हम ओपनिंग साझेदारी करने में नाकाम रहे।"
'आत्मविश्वास खो चुके थे हम'
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने साथ ही कहा कि टीम अपना आत्मविश्वास खो चुकी थी। बकौल धोनी, "हम टेस्ट सीरीज के दौरान अपना आत्मविश्वास खो बैठे थे और यही बात सबसे निराशाजनक रही। शुरुआत से ही हमारे बल्लेबाज अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए।"
उन्होंने आगे कहा, "निचले क्रम ने जरूर योगदान दिया लेकिन टॉप ऑर्डर ने निराश किया। आप 150-160 रन बनाकर घरेलू टीम पर दबाव नहीं बना सकते।"