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बल्लेबाजों का खेल हो गया क्रिकेट, तय की जाए बल्ले के आकार की सीमा

Fri, 03 Jun 2016 06:15 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले की अगुआई वाली आईसीसी क्रिकेट समिति ने सुझाव दिया है कि मेरिलबोर्न क्रिकेट क्लब (एमसीसी) को खेल में संतुलन बनाने के लिए बल्लों के आकार की सीमा तय करने के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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टी-20 और वनडे में मिसटाइम शॉट पर भी छक्का चला जाना विशेषज्ञों के लिए बड़ी चिंता का विषय है जिनका मानना है कि क्रिकेट तेजी से बल्लेबाजों का खेल बनता जा रहा है।

आईसीसी ने लार्ड्स में क्रिकेट समिति की चर्चा की जानकारी देते हुए कहा कि एमसीसी ने गेंद और बल्ले के बीच संतुलन बनाने के लिए किए जाने वाले बदलावों के संबंध में समिति से सुझाव देने को कहा था।
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समिति को एमसीसी से एक शोध पत्र मिला जिसमें वैज्ञानिक तथ्यों और आंकड़ों के जरिए दिखाया गया है कि हालिया वर्षों में बल्ले और अधिक मजबूत बन गए हैं और इसका प्रमुख कारण स्वीट स्पॉट का अधिक बड़ा होना है। इसमें कहा गया है कि समिति का मानना है कि एमसीसी को बल्ले और गेंद के बीच बेहतर संतुलन हासिल करने के लिए क्रिकेट के बल्लों के आकार की सीमा तय करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

आईसीसी समिति में कुंबले के अलावा टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़, श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर महेला जयवर्द्धने और इंग्लैंड के एंड्रयू स्ट्रॉस भी शामिल हैं। 
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सुरक्षित हेलमेट को लेकर भी चिंता जताई

आईसीसी समिति ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि ज्यादातर बल्लेबाज ब्रिटिश सुरक्षा मानक (बीएसएस) के अनुरूप हेलमेटों का उपयोग नहीं कर रहे हैं। आईसीसी के चिकित्सा सलाहकार डॉ क्रेग रैनसन के चोट को लेकर सतर्कता बरतने के प्रति रूझान को लेकर प्रस्तुति दी जिसके बाद समिति ने हेलमेट संबंधी सुरक्षा मसले पर विचार किया।

समिति ने इस पर चिंता जताई कि अब भी कई अवसरों पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ऐसे हेलमेट का उपयोग करते हैं जो ब्रिटिश सुरक्षा मानक की शर्तों को पूरा नहीं करते। उसने सिफारिश की है कि आईसीसी को सभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को बीएसएस वाले नए हेलमेट पहनने को बाध्य करना चाहिए।

समिति ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खिलाड़ी के सिर में चोट लगने पर उसकी जगह किसी अन्य खिलाड़ी को रखने पर विचार किया। समिति ने क्रिकेट में खिलाड़ियों को चोट लगने से बेहोशी छाने की गंभीरता को स्वीकार किया और इस संबंध में एक नीति लागू करने पर जोर दिया लेकिन उसका विचार था कि वर्तमान नियम और खेल की परिस्थितियां खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ संभावित चिकित्सा उपचार मुहैया कराने की अनुमति देते हैं और इस संबंध में नियमों में आगे बदलाव की जरूरत नहीं है। अवैध गेंदबाजी एक्शन को लेकर किए गए कार्यों के लिए समिति ने सदस्य देशों की सराहना भी की।
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