दो गेंदों पर 10 रन बनने के बाद भारत को अंतिम 3 गेंदों पर 5 रन चाहिए थे।
लेकिन चौथी ही गेंद पर धोनी ने एक और छक्का ठोककर टीम को नायाब जीत दिला
दी।
खिताबी जंग में लगातार दूसरे मौके पर कप्तान धोनी ने अंतिम ओवर में छक्का मारकर भारत को श्रीलंका पर शानदार जीत दिलाई है।
धोनी ने इससे पहले यही कमाल दो अप्रैल 2011 को मुंबई में विश्व कप के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ किया था। तब भारत 28 साल बाद विश्व चैंपियन बना था।
त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल में भारत एक समय हार के कगार पर पहुंच गया था और उसे 18 गेंदों पर 19 रन चाहिए थे। क्रीज पर धोनी और पुछल्ले बल्लेबाज इशांत शर्मा की अंतिम जोड़ी थी।
त्रिकोणीय सीरीज भी भारत के नाम ( देखें-फोटो गैलरी)
अगले दो ओवर (48 और 49वां ओवर) में भारत महज चार रन ही बना पाया। इसके बाद अंतिम ओवर में भारत के सामने जीत के लिए छह गेंदों में 15 रन बनाने थे।
लक्ष्य मुश्किल दिख रहा था और क्रीज पर थे कप्तान धोनी। धोनी ने इस ओवर से पहले अपना बल्ला भी बदल लिया और अंतिम ओवर खेलने को तैयार हो गए।
दूसरी ओर, श्रीलंकाई कप्तान एंजेलो मैथ्यूज के पास सारे हथियार खत्म हो चुके थे। उनके पास एक ही हथियार बचा तेज गेंदबाज शमिंडा इरंगा के रूप में। हालांकि इरंगा पिछले नौ ओवर में दो मेडन के साथ शिखर धवन और विराट कोहली के बड़े विकेट निकाल चुके थे।
इरंगा ने पहली गेंद फेंकी और धोनी उसे खेलने से चूक गए। इस गेंद पर कोई रन नहीं बना। इसके बाद दूसरी गेंद पर धोनी ने स्ट्रेट में शानदार छक्का जड़ दिया। तीसरी गेंद को उन्होंने प्वाइंट की दिशा में चार रन के लिए खेल दिया।
लगातार दो गेंदों पर 10 रन बनने के बाद भारत को तीन गेंदों पर पांच रन चाहिए थे। लेकिन अगली ही गेंद पर धोनी ने एक्स्ट्रा कवर में एक और छक्का ठोककर टीम को नायाब जीत दिला दी।
चैंपियंस ट्रॉफी के बाद विश्व चैंपियन भारत की यह लगातार दूसरी खिताबी जीत है।