मनिंदर कहते हैं, 'पहले मैं धोनी की बल्लेबाजी को लेकर कुछ चिंतित था। मैं अब यह कहूंगा कि धोनी बतौर विकेटकीपर भारत के लिए विश्व कप के मद्देनजर बहुत जरूरी हैं। आप विश्व कप जैसे बड़े मंच पर वन-डे में यंग ऋषभ पंत पर विकेटकीपर के रूप में अभी भरोसा नहीं कर सकते हैं। उन्हें आप विश्व कप जैसे बड़े मंच पर उतारेंगे तो मुश्किल में फंसने की आशंका ज्यादा है।'
धोनी की मौजूदगी में बतौर कप्तान विराट कोहली भारत की 'कप्तानी' की अपनी गाड़ी बेफिक्र होकर चलाते हैं क्योंकि उनके जेहन में रहता है कि धोनी के रूप में उनकी बगल में 'अनुभवी ड्राइवर' बैठा हुआ है। कोई भी मुश्किल मोड़ आएगा तो धोनी 'गाड़ी' संभाल लेंगे। धोनी को मौजूदा सीरीज के अंतिम दो वन-डे में आसाम देने की कोई तुक नहीं थी। उनकी गैर मौजूदगी अंतिम दो वन-डे में मुश्किल क्षणों में विराट कोहली को धोनी की कमी अनुभवी मार्गदर्शक के रूप में बहुत खली।'
'खासतौर पर मोहाली में जब ऑस्ट्रेलिया ने कप्तान एरोन फिंच और शॉन मार्श के रूप में शुरू के दो विकेट 12 रन पर गंवा दिए और उसके बाद उस्मान ख्वाजा और हैंडकॉम्ब की जोड़ी के जमने का कारण कप्तान विराट कोहली का कामचलाउ केदार जाधव और विजय शंकर से गेंदबाजी कराना रहा।'
'जब यह ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी कुछ ही जमती लग रही थी तो तब भारत ने अपने कुलदीप यादव और यजुवेंद्र चहल जैसे स्पिनरों को लगा कर इस जोड़ी को तोडने की कोशिश की होती तो ज्यादा बेहतर होता। मैदान पर आक्रामकता जरूरी है लेकिन एक हद तक ही। जीत के बाद भी जश्न मनाने में गरिमा की जरूरी है लेकिन हमारे कई खिलाड़ी इसमें भी सीमा लांघ जाते हैं। विकेट चटकाने के बाद केदार जाधव के बेवजह के आक्रामक तेवर गैरजरूरी थे।'