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टेस्ट सीरीज की हार का बदला लेना टीम इंडिया का लक्ष्य

Fri, 11 Jan 2013 10:41 AM IST
राजकोट/एजेंसी
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इंग्लैंड से टेस्ट सीरीज और फिर पाकिस्तान से वन-डे सीरीज में मिली शिकस्त के बाद भारतीय टीम को एक नई शुरुआत की तलाश है। 2011 वर्ल्ड कप के बाद से भारतीय टीम के प्रदर्शन में काफी गिरावट आई है। विदेश में ही नहीं बल्कि अपनी सरजमीं पर भी उसे लगातार शिकस्त का सामना करना पड़ा। ऐसे में टीम इंडिया शुक्रवार को जब इंग्लैंड के खिलाफ पहला वन-डे खेलने उतरेगी तो उसकी नजर जीत की लय हासिल करने पर होगी।
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भारतीय टीम के पास पांच वन-डे मैचों की सीरीज में इंग्लैंड का सूपड़ा साफ करके पहली बार नंबर वन टीम बनने का मौका भी है। पाकिस्तान के खिलाफ तीसरे वन-डे में मिली जीत से भारतीय टीम का मनोबल बढ़ा होगा। सचिन तेंदुलकर ने हाल में वन-डे क्रिकेट से संन्यास ले लिया है जबकि वीरेंद्र सहवाग खराब फार्म के कारण टीम से बाहर हैं। लिहाजा, ओपनर अजिंक्य रहाणे के पास खुद को साबित करने का पूरा मौका है।

हालांकि सौराष्ट्र की ओर से रणजी क्वार्टर फाइनल मैच में ताबड़तोड़ तिहरा शतक ठोककर जोरदार दस्तक दे चुके चेतेश्वर पुजारा को प्लेइंग इलेवन में शायद ही मौका मिले। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने संकेत दिए कि फिलहाल टीम के हिसाब से उनकी जगह नहीं बन पा रही है। ऐसे में उन्हें वन-डे कैरियर के आगाज के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।
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दूसरी ओर, दो वन-डे अभ्यास मैचों में हारने के बाद इंग्लैंड की टीम को भी रणनीति बदलकर मैदान में उतरना होगा। कप्तान एलिस्टर कुक की अगुआई में टीम टेस्ट सीरीज में कामयाबी हासिल करने के बाद मेहमान टीम वन-डे में भी इतिहास रचना चाहेगी। हालांकि इंग्लैंड की एकदिवसीय टीम औसत फार्म में दिख्राई दे रही है।

दिल्ली के खिलाफ इयोन मोर्गन, क्रेस कीसवेटर और इयान बेल ने अपने बल्ले की चमक दिखाई थी। बेल ने दोनों अभ्यास मैचों में शानदार बल्लेबाजी की लेकिन कुल मिलाकर अभ्यास मैचों में इंग्लिश टीम अपनी प्रतिष्ठा के साथ न्याय नहीं कर सकी। इसका मनोवैज्ञानिक फायदा भारत को मिल सकता है।

इंग्लिश टीम ने 2011-12 सत्र में भारत का दौरा किया था और उसे पांच मैचों की श्रृंखला में 5-0 से हार मिली थी। वह हार झकझोरने वाली थी। यह पहला मौका नहीं है, जब भारत ने इंग्लिश टीम का अपने घर में सूपड़ा साफ किया है। इससे पहले 2008-09 सत्र में भी उसने पांच मैचों की श्रृंखला में 5-0 से जीत हासिल की थी। 2005-06 सत्र में भारत ने सात मैचों की श्रृंखला में इंग्लैंड को 5-1 से हराया था।

इंग्लिश टीम के लिए भारत में एकदिवसीय श्रृंखला जीतना कभी भी आसान नहीं रहा है। अब जबकि उसके साथ कई नए खिलाड़ी हैं और वे पहली बार भारत में खेल रहे हैं, कप्तान एलिस्टर कुक के सामने हालात के साथ तालमेल बनाने में सबसे अधिक दिक्कत आ सकती है क्योंकि अपनी पिचों पर भारतीय बल्लेबाज और स्पिन गेंदबाज हमेशा अच्छा प्रदर्शन करते हैं और ग्राहम गूच और माइक गैटिंग के बाद इंग्लिश बल्लेबाज हमेशा से स्पिन कला के खिलाफ कमजोर माने जाते रहे हैं।

बल्लेबाजों की मददगार होगी पिच
सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के बीच पहले वन-डे में बड़ा स्कोर देखने को मिल सकता है। स्टेडियम के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘यह देखकर अच्छा लगा कि भारतीय बल्लेबाजों का आत्मविश्वास कुछ बढ़ा है। यहां का विकेट बल्लेबाजों को मदद करेगा और यहां करीब 300 रन बन सकते हैं।’
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