लखनऊ सुपर जाएंट्स बनाम सनराइजर्स हैदराबाद
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इस मैच में कुछ भी हैदराबाद के पक्ष में नहीं रहा। पिछले सीजन भी यह टीम प्लेऑफ में नहीं पहुंच पाई थी। इसके बाद इस टीम के कप्तान से लेकर प्रमुख खिलाड़ी तक सब कुछ बदल दिया गया। उम्मीद की जा रही थी कि यह टीम इस सीजन अच्छा प्रदर्शन करेगी, लेकिन अब तक सनराइजर्स हैदराबाद टूर्नामेंट की सबसे खराब टीम के रूप में सामने आई है।
पहले मैच में हैदराबाद के कप्तान एडेन मार्करम सहित कई प्रमुख खिलाड़ी नहीं थे। ऐसे में टीम की हार को कप्तान की गैरमौजूदगी से जोड़कर देखा गया, लेकिन इस मैच में कप्तान एक गेंद खेलने और टॉस में शामिल होने के अलावा कुछ खास नहीं कर पाए।
फिर फेल हुए बल्लेबाज
राजस्थान के खिलाफ मैच में भी हैदराबाद के बल्लेबाज फेल हुए थे। तब माना गया कि 200 रन से ज्यादा के स्कोर दबाव था। इस वजह से बल्लेबाज गलत शॉट खेलकर आउट हुए। हालांकि, इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए भी टीम का वही हाल रहा। सभी प्रमुख बल्लेबाज एक-एक कर आउट हो गए। राहुल त्रिपाठी ने रन भी बनाए तो उनका स्ट्राइक रेट सिर्फ 85 का रहा। वहीं, वाशिंगटन सुंदर ने भी 57 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। टीम के पांच बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा नहीं छू पाए।
सात प्रमुख बल्लेबाजों की बात करें तो तीन दहाई का आंकड़ा नहीं छू पाए। दो का स्ट्राइक रेट 100 से कम रहा। सिर्फ अब्दुल समद (10 गेंद में 21 रन) और अनमोलप्रीत सिंह (26 गेंद में 31 रन) ही संतोषजनक प्रदर्शन कर पाए।
नहीं चले गेंदबाज
सनराइजर्स हैदराबाद की टीम हमेशा से ही अच्छी गेंदबाजी के लिए जानी जाती है, लेकिन इस सीजन इस टीम की गेंदबाजी भी फ्लॉप रही है। सबसे सीनियर गेंदबाज भुवनेश्वर ने इस मैच में सिर्फ दो ओवर करने में पांच वाइड गेंद कर दी। अकेले फजलहक फारुकी ने अच्छी गेंदबाजी की। पिछले मैच में टी नटराजन लय में दिखे थे, लेकिन इस मैच में वह भी कोई विकेट नहीं ले सके।
कप्तानी और खराब रणनीति हार की सबसे बड़ी वजह
इस मैच में एडेन मार्करम की कप्तानी हार की सबसे बड़ी वजह रही। वह स्पिन पिच पर पहले बल्लेबाजी करते हुए प्लेइंग-11 में चार प्रमुख गेंदबाजों के साथ उतरे। जबकि उनकी टीम में दो ऑलराउंडर भी थे। बल्लेबाजी के समय वह खुद पहली ही गेंद पर आउट हो गए। इसके बाद राहुल त्रिपाठी और वॉशिंगटन सुंदर ने बेहद धीमी बल्लेबाजी की। इसी वजह से टीम लड़ने लायक स्कोर तक नहीं पहुंच सकी।
पहली पारी में लखनऊ के स्पिन गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया था। ऐसे में उम्मीद थी कि हैदराबाद की टीम मयंक मार्कंडेय को अपनी टीम में शामिल करेगी। मार्करम ने ऐसे में फजलहक फारुखी को टीम में जोड़ा। फारुकी ने अच्छी गेंदबाजी की, लेकिन वह सिर्फ एक विकेट ले पाए। मार्करम के फैसले का असर यह हुआ की गेंदबाजी के समय उनके पास सिर्फ एक प्रमुख स्पिनर (आदिल राशिद) था।
छोटे स्कोर का बचाव करने के लिए हैदराबाद को विकेट लेना जरूरी था और शुरुआत से ही यह साफ था कि स्पिन गेंदबाज ही इस पिच पर आसानी से विकेट दिला सकते हैं। ऐसे में मार्करम ने अपने प्रमुख स्पिनर राशिद से तीन ही ओवर कराए। दूसरे स्पिनर सुंदर से भी एक ही ओवर कराया और वह भी पावरप्ले में था। खुद मार्करम ने दो ओवर की गेंदबाजी की। स्पिन पिच पर स्पिनर्स ने सिर्फ छह ओवर किए, जबकि तेज गेंदबाजों ने 10 ओवर कर दिए। ऐसे में टीम की हार तय थी।