सबसे प्रमुख संशोधनों में पदाधिकारियों के लिए विश्राम की अवधि (कूलिंग ऑफ पीरियड) से जुड़े नियमों को बदलना, अयोग्यता से जुड़े विभिन्न मानदंडों को शिथिल करना और संविधान में बदलाव करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी लेने की जरूरत को समाप्त करना शामिल हैं।
शंकरनारायणन ने कहा, 'इसका मतलब होगा कि जहां तक क्रिकेट प्रशासन और सुधारों की बात है तो फिर से पुराने ढर्रे पर लौट जाना। अधिकतर महत्वपूर्ण बदलावों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।'
शंकरनारायणन लोढ़ा समिति के सचिव थे जिसे सुप्रीम कोर्ट ने देश के क्रिकेट प्रशासन में सुधार करने के लिए 2015 में नियुक्त किया था। पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर. एम लोढ़ा इस समिति के अध्यक्ष थे जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर.वी रवींद्रन और अशोक भान भी शामिल थे। शंकरनारायणन ने कहा कि अगर बदलावों को अपनाया जाता है तो उन्हें अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
उन्होंने कहा, 'वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि जब वो (बीसीसीआई) (संविधान में) बदलाव करेगा तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट की अनुमति की जरूरत नहीं होगी।'