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लेकिन इस बार ठीक नहीं रही सचिन की टाइमिंग

Mon, 24 Dec 2012 12:27 AM IST
नई दिल्ली/स्पोर्ट्स डेस्क
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रविवार की सर्द दोपहर को जब टीवी पर इंडिया गेट पर धारा 144 लगाने की खबरें सुर्खियां बन रही थी तभी अचानक सचिन तेंदुलकर के वन-डे से संन्यास का फ्लैश आया। यह खबर बीसीसीआई के हवाले से थी और सचिन का बयान भी। कुछ ही देर बाद पाकिस्तान के खिलाफ होने वाली वन-डे टीम की घोषणा कर दी गई।
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इसमें सचिन का नाम नहीं था। क्रिकेट के महानायक की वन-डे से विदाई राजधानी के प्रदर्शन की खबरों में दब गई। लेकिन सचिन की विदाई बहुत से सवाल भी खड़े कर गई। क्या अपने कैरियर में सचिन पहली बार राष्ट्रीय टीम से ड्रॉप कर दिए गए थे? इतनी बड़ी घोषणा सचिन ने अहम सीरीज से पहले खुद क्यों नहीं की और रिकी पोंटिंग की तरह मैदान पर खेलकर विदा क्यों नहीं हुए? वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली की तरह क्या सचिन भी बोर्ड के खराब एटीट्यूड का शिकार हुए?

ये सभी ऐसे सवाल थे जो हर क्रिकेटप्रेमी के जेहन में थे। इन सभी के जवाब धीरे-धीरे ही मिलेंगे, शायद न भी मिलें। यदि हालिया टेस्ट सीरीज में खराब प्रदर्शन के बाद सचिन चयनकर्ताओं को अपने फैसले का संकेत दे भी चुके थे तो क्या सचिन को तीन वन-डे खेलने के लिए मनाया नहीं जा सकता था। तब क्या यह पाकिस्तान के खिलाफ होने वाली सीरीज को और रोमांचक नहीं बना देता!
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इसके अलावा हालिया दिनों में सचिन का प्रदर्शन वन-डे में खराब नहीं था। सिर्फ टेस्ट क्रिकेट में वह अपनी पारियों को बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पाए। उनकी फॉर्म खराब नहीं थी। टेस्ट सीरीज से पहले उन्होंने मुंबई के लिए रणजी में बेहतरीन शतक ठोका था। जब टीम इंडिया पाक के खिलाफ वन-डे खेल रही होगी तब सचिन शायद 29 दिसंबर से होने वाले रणजी मैच में खेलते नजर आएंगे।

उनका मकसद आस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए खुद को तैयार करना है। सचिन का मोबाइल फोन कई दिनों से स्विच ऑफ था। वह अपनी पत्नी अंजलि के फोन पर ही जरूरी फोन रिसीव कर रहे थे। जाहिर था उनके जेहन में अपने चहेते खेल क्रिकेट से विदाई का सबसे मुश्किल सवाल चल रहा था। कुछ भी हो लेकिन अपने शॉट्स में टाइमिंग के माहिर सचिन की टाइमिंग इस फैसले में कतई सही नहीं थी!

72 घंटे पहले ले लिया था फैसला :-
सचिन ने नागपुर टेस्ट के बाद अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। अगले तीन दिनों तक उनसे संपर्क करना लगभग नामुमकिन था। वह खुद के साथ समय बिताना चाहते थे। वनडे क्रिकेट से संन्यास का फैसला भी उन्होंने 72 घंटे पहले ही कर लिया था, लेकिन बीसीसीआई को इसकी जानकारी शनिवार रात को दी। सचिन के करीबी ने यह जानकारी दी।

मोड़ दी खेल की दिशा :-
27 मार्च 1994। ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच से पहले सलामी बल्लेबाज नवजोत सिद्धू चोट के चलते बाहर हो गए। सवाल उठा ओपनिंग कौन करेगा, सचिन से पूछा गया तो उन्होंने यह जिम्मेदारी ली। सचिन पहली बार पारी की शुरुआत करने के लिए मैदान में उतरे और उन्होंने वनडे क्रिकेट में आक्रामक आगाज की नई शुरुआत कर डाली। न्यूजीलैंड के खिलाफ 143 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सचिन ने महज 49 गेंदों में 82 रन ठोक डाले, जिसमें 15 चौके और 2 छक्के शामिल थे। भारत ने महज 23.2 ओवर में यह मैच जीत लिया। इसके बाद लगभग हर टीम ने ओपनर की भूमिका के लिए अपनी टीम के आक्रामक बल्लेबाज को चुना। 1996 में कालू वितर्णा और सनथ जयसूर्या ने इसी परिपाटी पर चलते हुए श्रीलंका को विश्व कप जितवाया।
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विश्व कप में सचिन
वर्ष    मैच    रन    सर्वश्रेष्ठ    औसत    100
1992    8    283    84    47.16     0
1996    7    523    137    87.16     2
1999    7    253    140*   42.16     1
2003    11    673   152    61.18      1        
2007    3    64    57*    32.00     0
2011    9    482    120    53.55     2

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