मैच फिक्सिंग के आरोपों को लेकर पिछले 12 साल से आजीवन प्रतिबंध झेल रहे पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने बीसीसीआई द्वारा अजहर पर लगाए गए प्रतिबंध को अवैध ठहराते हुए इसे बोर्ड की एकतरफा कार्रवाई करार दिया।
जस्टिस आशुतोष मोहंता और जस्टिस कृष्णा मोहन रेड्डी की पीठ ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अजहर की अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। निचली अदालत ने बीसीसीआई के फैसले को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने मुरादाबाद से कांग्रेस सांसद अजहर के वकील रमाकांत रेड्डी की उस दलील को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने तर्क रखा था कि ऐसा कोई सुबूत नहीं है, जिससे लगता हो अजहर क्रिकेट खेलने के दिनों में किसी दबाव के आगे झुके हों।
अजहर ने कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर की है। आजीवन प्रतिबंध के लिए बोर्ड पर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई करने की बात को खारिज करते हुए उन्होंने भविष्य में बीसीसीआई के साथ काम करने की इच्छा भी जताई। वहीं बीसीसीआई ने कोर्ट के फैसले पर सोच समझकर आगे कोई कदम उठाने की बात कही है।
हालांकि अजहर के कानूनी कार्रवाई न करने के फैसले से संभावना जताई जा रही है कि बोर्ड भी इस मामले में नरम रुख अपना सकता है। आजीवन प्रतिबंध की वजह से अजहर टेस्ट मैचों का शतक पूरा करने से चूक गए थे। उन्होंने 99 टेस्ट मैच खेले हैं। बीसीसीआई ने देश के सबसे सफल कप्तानों में से एक अजहर पर वर्ष 2000 में मैच फिक्सिंग में कथित संलिप्तता के कारण आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था।
मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। प्रशंसकों का धन्यवाद। जो होना था हो चुका, मुझे किसी से शिकायत नहीं है। मैंने पूरी ईमानदारी से देश का प्रतिनिधित्व किया। मोहम्मद अजहरुद्दीन
क्या था मामला
7 अप्रैल 2000 को ठोस सुबूत का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने द. अफ्रीका के पूर्व कप्तान हैंसी क्रोन्ये पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगाया। पहले क्रोन्ये ने आरोपों को बेबुनियाद बताया, लेकिन 15 जून को एक बयान जारी कर मैच फिक्सरों से अपने संबंध की बात कबूली। उन्होंने सबसे पहला आरोप मोहम्मद अजहरुद्दीन पर लगाया।
क्रोन्ये ने कहा कि 1996 में कानपुर टेस्ट मैच के दौरान अजहर ने उन्हें मुकेश गुप्ता नाम के फिक्सर से मिलवाया था। अजहर पर दिसंबर 2000 में बीसीसीआई की तीन सदस्यीय समिति की सिफारिश पर आजीवन प्रतिबंध लगाया गया। अजहर ने 2001 में सिटी सिविल कोर्ट में याचिका दायर की। स्थानीय अदालत ने 2003 में बैन को सही ठहराया। फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट गए।
बीसीसीआई के साथ काम करने को तैयार
आजीवन प्रतिबंध हटने के बाद क्रिकेट के मैदान पर वापसी के बारे में पूछे जाने पर अजहर ने कहा कि मैंने कई वर्षों से क्रिकेट नहीं खेला है। मैं अब मैदान पर वापसी नहीं कर सकता हूं, लेकिन मैं इस खेल में हमेशा से ही कुछ करना चाहता हूं और मैं जरूर ही क्रिकेट के लिए कुछ करूंगा। मैं नहीं जानता कि बीसीसीआई की प्रतिक्रिया क्या होगी, लेकिन मैं क्रिकेट और क्रिकेटरों के विकास के लिए काम करने को तैयार हूं।
बीसीसीआई समीक्षा के बाद उठाएगी कोई कदम
हाईकोर्ट के फैसले पर बीसीसीआई ने कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी है। बोर्ड उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला का कहना है कि अभी फैसला आया है। बोर्ड को इसकी कॉपी नहीं मिली है। बोर्ड का लीगल सेल इस फैसले की समीक्षा करेगा। इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष श्रीनिवासन इस मामले में कोई अगला कदम उठाने पर निर्णय लेंगे।
टाइम लाइन
2000 : बीसीसीआई ने बैन लगाया
2001 : फैसले के खिलाफ सिविल कोर्ट गए।
2003 : स्थानीय अदालत ने अपील खारिज की।
2003 : हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अजहर का कैरियर
टेस्ट :-
मैच, 99
रन, 6215
शतक, 22
वनडे :-
मैच, 334
रन, 9378
शतक, 7