मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के आजीवन सदस्य संजीव गुप्ता ही वह शख्स हैं, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड में क्रांति लाना चाहते हैं। गुप्ता को बचपन से क्रिकेट में दिलचस्पी थी। ऑफ स्पिन गेंदबाजी किया करते थे, एक बार यूनिवर्सिटी की टीम से भी खेलना का मौका मिला, लेकिन ज्यादा आगे तक नहीं जा पाए। बीसीसीआई के संविधानों की गहरी जानकारी रखने वाले गुप्ता मीडिया की चकाचौंध से दूर रहते हैं। अबतक वह सीओए को करीब 400 ईमेल भेज चुके हैं।
इंदौर के रहने वाले 45 वर्षीय संजीव गुप्ता करीब तीन साल से बीसीसीआई के प्रशासकों की समिति और आचार अधिकारी के काम का तनाव बढ़ा रखे हैं। मीडिया से बात करने में संकोच करने वाले संजीव गुप्ता कानून के अच्छे जानकार हैं। क्रिकेटर्स की हर शिकायत वह तथ्यों और नियमों के आधार पर ही करते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार गुप्ता लगातार पत्रकारों के संपर्क में रहते हैं, लेकिन उन्होंने इंटरव्यू देने से साफ मना कर दिया, यहां तक की अपनी फोटो भी साझा नहीं की।
गुप्ता की माने तो उनकी किसी से कोई दुश्मनी है। शिकायत करने के पीछे उनका कोई निजी स्वार्थ भी नहीं है। वह सिर्फ लोढ़ा कमेटी के नियमों का 100 फीसदी अनुपालन करवाना चाहते हैं। खुद बीसीसीआई के अधिकारी उनके ज्ञान और संविधान की जानकारी से हतप्रभ हैं। गुप्ता से अगर एक खंड के बारे में पूछा जाए तो, वह पृष्ठ क्रमांक समेत सब कुछ बता देते हैं।
संजय सबसे पहले उस वक्त चर्चा में आए जब, जब बीसीसीआई के लोकपाल अधिकारी जस्टिस डीके जैन ने उनकी शिकायत के आधार पर सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण के खिलाफ सुनवाई की। गुप्ता ने आरोप लगाया था कि पूर्व क्रिकेटर ने दो पद संभाल हुए हैं। जो लोढ़ा कमिटी की 'एक व्यक्ति एक पद' नियम के खिलाफ है। हालांकि निर्णय आने से पहले ही सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट सलाहकार समिति से इस्तीफा दे दिया था। इन सबके बीच गुप्ता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा, कुछ दिनों पहले दिल्ली के एक वकील ने गुप्ता को कानूनी नोटिस भेजा था, जिसकी उन्होंने वैसे ही जवाब भी दिया।