बीसीसीआई के चयनकर्ताओं ने मौजूदा टीम में कई अनुभवी खिलाड़ियों जैसे मोहम्मद शमी, संजू सैमसन, रवींद्र जडेजा को नजरअंदाज किया, लेकिन केकेआर के तेज गेंदबाज हर्षित राणा को टीम में जगह मिली। इस चयन ने एक सवाल उठाया कि क्या चयन सिर्फ प्रदर्शन के आधार पर किया गया या किसी अन्य वजह से। भारत के 1983 वर्ल्ड कप विजेता और पूर्व कप्तान और मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने अब हर्षित राणा के चयन पर सीधे तौर पर टिप्पणी की है।
श्रीकांत ने साधा निशाना
श्रीकांत ने अपने चीकी चाका यूट्यूब चैनल पर कहा, 'सबसे अच्छा यही है कि हर्षित राणा की तरह गंभीर के सामने हमेशा हर बात पर हां कहने और जो कहे वो करने वाला बनो, तभी टीम में चयन हो सकेगा। टीम में केवल एक स्थायी सदस्य है और वह है हर्षित राणा। कोई नहीं जानता कि वह टीम में क्यों है। आप कुछ को उनके प्रदर्शन के बावजूद नहीं चुनते और दूसरों को चुन लेते हैं। इसलिए हर्षित की तरह गंभीर के सामने हमेशा हां करने वाला बनो।'
नीतीश रेड्डी पर भी उठाए सवाल
श्रीकांत ने यह भी कहा कि अगर हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी को 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए टीम में शामिल किया जाता है, तो भारत को खिताब जीतने की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए। श्रीकांत ने नीतीश रेड्डी के चयन को लेकर भी टीम मैनेजमेंट पर सवाल खड़े किए। उनका मानना है कि खिलाड़ी को वनडे फॉर्मेट में जल्दी ही एक निश्चित भूमिका में डाल दिया गया है, जबकि भारत को 2027 विश्व कप के लिए अच्छा प्रदर्शन और अनुभव वाले खिलाड़ियों पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'आपको 2027 वर्ल्ड कप के लिए टीम बनानी चाहिए। लेकिन मेरा मानना है कि उन्होंने ऐसा नहीं किया। अगर आप हर्षित राणा और नीतीश रेड्डी को संभावित खिलाड़ियों में रखते हैं, तो ट्रॉफी को अलविदा कह देना चाहिए।'
गंभीर की भूमिका और चयन प्रक्रिया पर सवाल
श्रीकांत ने संकेत दिया कि मुख्य कोच गौतम गंभीर का चयन प्रक्रिया में प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। उनके अनुसार, हर्षित राणा का गंबीर का 'फेवरेट' होना टीम संस्कृति में गहरी समस्या को उजागर करता है। इस बात ने चयन प्रक्रिया और टीम निर्माण पर एक नई बहस को जन्म दिया है, खासकर उस समय जब टीम ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ मिशन 2027 वर्ल्ड कप की तैयारी की शुरुआत करने जा रही है।
फैंस और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
इस विवाद ने सोशल मीडिया और क्रिकेट कम्युनिटी में हलचल पैदा कर दी है। कई फैंस और पूर्व खिलाड़ी श्रीकांत के विचारों से सहमत हैं और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि युवा खिलाड़ियों को मौका देना भी टीम की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।