धाकड़ बल्लेबाज और जिम्बाब्वे दौरे में भारतीय टीम की अगुवाई कर रहे विराट कोहली कभी भी अपना आपा खो बैठते हैं, लेकिन उन्हें अपने समकक्ष जिम्बाब्वे के कप्तान से सीख लेनी चाहिए।
पांच मैचों की सीरीज में मेजबान जिम्बाब्वे टीम इस समय 2-0 से पिछड़ी हुई है। लेकिन उनके कप्तान ब्रेंडन टेलर ने उस समय भी धैर्य नहीं खोया जब एक विवादित फैसले ने उन्हें पवेलियन की राह दिखा दी।
महज दो रन पर दो विकेट गंवाने के बाद जिम्बाव्वे टीम गंभीर संकट में दिख रही थी और उसे एक बड़ी साझेदारी की दरकार थी। कप्तान टेलर और हैमिल्टन मास्कजदा ने तीसरे विकेट के लिए 65 रनों की साझेदारी कर टीम की जरूरत को पूरा करते हुए संकट से बाहर निकाल दिया।
लेकिन बेहतरीन बल्लेबाजी कर रहे टेलर को 16वें ओवर की तीसरी गेंद पर जयदेव उनादकट ने मिड ऑफ पर खड़े मोहम्मद शमी के हाथों कैच आउट करा दिया। हालांकि शमी ने शानदार प्रयास कर कैच करने की कोशिश की और उनका कैच क्लीयर नहीं लग रहा था।
सही फैसले के लिए मैदानी अंपायर ने थर्ड अंपायर से फैसले देने को कहा और उन्होंने टेलर को आउट करार दे दिया।
जबकि टीवी रिप्ले में दिख रहा था कि शमी ने सही कैच नहीं लिया है। लेकिन आउट करार दिए जाने के बाद टेलर अंपायरों से कुछ भी बोले बगैर वापस लौट गए।
इससे पहले दूसरे वनडे में भारतीय कप्तान कोहली के साथ भी यही हुआ था, लेकिन उन्होंने अंपायर से जमकर बहसबाजी की थी और बल्ला हवा में लहराते हुए वापस लौटे थे।
कोहली पर प्रतिबंध लगने की बात भी उठी थी। ऐसा नहीं है कि कोहली मैदान पर अपने खिलाफ फैसले पर पहली बार नाराज हुए थे, इससे पहले भी वह कई मौकों पर अंपायरों के फैसले के खिलाफ नाराजगी जता चुके हैं।