भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्पिनर और भारतीय क्रिकेटर्स समूह (आईसीए) और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के सदस्य प्रज्ञान ओझा ने विराट कोहली और बीसीसीआई के बीच सामने आए विवाद पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि कोहली कप्तानी को लेकर बयान देते वक्त सही शब्दों का चयन कर सकते थे।
कोहली को रखना चाहिए था ध्यान
प्रज्ञान ने कहा- कोई भी व्यक्ति बयान देते वक्त अपी अच्छाइयों को दिखाता है। उसे पता होता है कि लोगों के सामना उसे क्या कहना है और क्या दिखाना है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के वक्त कुछ ऐसा नहीं कहना चाहिए था, जिससे विवादों को तूल मिले। यह भारतीय क्रिकेट के लिए सही नहीं है।
कप्तानी को लेकर अलग-अलग बयान
रोहित शर्मा को वनडे कप्तान नियुक्त करने के बाद से भारतीय क्रिकेट में विवाद सामने आया। बीसीसीआई ने कहा था कि कोहली को कप्तानी से हटाने पहले 48 घंटे का समय दिया गया था, लेकिन इतने समय में उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ऐसे में 49वें घंटे में हमें कोहली को हटाना पड़ा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोहली का बयान
वहीं, कोहली ने अपने बयान में कहा था कि मुझे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीम चुने जाने से सिर्फ डेढ़ घंटे पहले जानकारी दी गई। कोहली ने कहा कि मुख्य चयनकर्ता ने कॉल पर मुझसे बात की और फोन रखने से पहले मुझे जानकारी दी कि तुम्हें वनडे कप्तानी से हटाया जा रहा है। इसपर कोहली का जवाब सिर्फ ओके था।
2019 विश्व कप की हार के बाद भी चयन समिति विराट के समर्थन में रही
महेंद्र सिंह धोनी के 2017 में वन डे टीम की कप्तानी छोड़ने के बाद विराट कोहली टीम इंडिया के तीनों संस्करणों के कप्तान बने। यह दौर एमएसके प्रसाद की अगुवाई वाली चयन समिति का था। इस दौरान भी कुछ ऐसे मौके आए जब विराट की कप्तानी को लेकर सवाल उठे, लेकिन प्रसाद की चयन समिति की बैठकों में एक बार भी विराट को कप्तानी से हटाने की चर्चा नहीं हुई। यहां तक 2019 के वन डे विश्व कप की अप्रत्याशित हार के बाद भी विराट की कप्तानी को लेकर चयन समिति में सवाल नहीं खड़े हुए, लेकिन 2020 में एमएसके प्रसाद की चयन समिति बदलते ही विराट की कप्तानी को लेकर भी समीकरण बदल गए।
विराट की कप्तानी के दौर में 2017 से 2020 तक चयनकर्ता रहे पूर्व टेस्ट क्रिकेटर सरनदीप सिंह अमर उजाला से यहां तक खुलासा करते हैं कि 2019 के विश्व कप के बाद भी चयन समिति में विराट और रोहित के बीच मतभेद या टीम में गुटबाजी की बात सामने नहीं आई।
चयन समिति की हर बैठक में शामिल होते थे विराट : सरनदीप का कहना है कि विराट की कप्तानी में उनकी चयन समिति ने कई बैठकें कीं, हर बैठक में कप्तान को आमंत्रित किया जाता था। समिति को कभी भी विराट को कप्तानी से हटाने की जरूरत महसूस नहीं हुई।
सरनदीप हैरान हैं कि विराट को डेढ़ घंटे पहले कप्तानी से हटाने की बात मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने बताई। अगर उनके समय में ऐसा होता तो एमएसके प्रसाद दो से तीन दिन पहले ही यह बता देते कि उन्हें कप्तानी से हटाया जा रहा है।