भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज केएल राहुल ने बताया कि उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ शतक लगाने के बाद किसके लिए जश्न मनाया था। राहुल के बल्ले से करीब नौ साल बाद घरेलू जमीन पर टेस्ट शतक निकला है। राहुल ने जैसे ही शतक पूरा किया उन्होंने अनोखे अंदाज में जश्न मनाया जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। अब राहुल ने बताया कि उन्होंने यह जश्न अपनी बेटी के लिए मनाया था।
भारतीय सरजमीं पर जड़ा दूसरा टेस्ट शतक
राहुल और उनकी पत्नी आथिया शेट्टी इस साल 24 मार्च को माता-पिता बने थे। आथिया ने बेटी को जन्म दिया था। केएल राहुल ने टेस्ट करियर का 11वां शतक जड़ा। भारतीय सरजमीं पर उनका दूसरा टेस्ट शतक रहा। उन्होंने 190 गेंदों पर शतक पूरा किया। लंच ब्रेक के बाद राहुल अपनी लय बरकरार नहीं रख सके और उन्हें वॉरिकन ने कैच आउट कराया। राहुल 197 गेंदों पर 12 चौकों की मदद से 100 रन बनाकर आउट हुए।
राहुल ने किस तरह मनाया था जश्न?
भारत में टेस्ट शतक लगाने के अपना सूखा समाप्त करने के बाद राहुल ने हेल्मेट उतारा और ड्रेसिंग रूम की तरफ बल्ला लहराया। इसके बाद उन्होंने अपनी दो अंगुलियां मुंह के अंदर डाली। ऐसा लग रहा था कि राहुल अपनी बेटी इवाराह को कुछ संदेश दे रहे हैं। जैसा अंदाजा था, हुआ भी वैसा ही। राहुल ने अब खुद स्पष्ट किया कि उन्होंने यह जश्न अपनी बेटी के लिए मनाया था। दिन का खेल समाप्त होने के बाद राहुल से उनके जश्न को लेकर पूछा गया, जिस पर इस बल्लेबाज ने कहा, ये मेरी बेटी के लिए था।
राहुल से घरेलू मैदान पर बने सिर्फ दो शतकों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, नहीं पता, सच में। लेकिन मैंने पिछले एक साल में अपनी बल्लेबाजी की लय बनाए रखने पर काम किया है। बस उन सभी दौर का आनंद ले रहा हूं जो मेरे लिए इतने रोमांचक नहीं होते। जब आप विदेश में अतिरिक्त उछाल के साथ स्विंग वाली परिस्थितियों में खेलते हैं तो ऐसा करना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है और जब आप घर वापस आते हैं और जब तीन स्पिनर खेल रहे होते हैं तो आपको एक रन लेकर स्कोर बढ़ाने की जरूरत होती है क्योंकि बाउंड्री इतनी आसानी से नहीं लगतीं।
राहुल ने कहा, यह ऐसी चीज है जिस पर मैंने काम किया है और मुझे इसका आनंद लेने के लिए मानसिक बदलाव की जरूरत थी। मैंने कड़ी मेहनत का आनंद लेने के साथ एक या दो रन बनाकर शतक बनाने पर काम किया। मैंने पिछले एक साल में इसी पर काम किया है। मुझे लगता है कि यही एकमात्र अंतर है जो मैं पहले घरेलू मैदान पर खेलते समय उतना अच्छा नहीं कर पाता था।