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यादों में आजादः 'वो शख्स न थमता है न रुकता'

Sat, 17 Aug 2013 01:41 PM IST
चंडीगढ़/अरविंद बाजपेयी
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क्रिकेट के द्रोणाचार्य देश प्रेम आजाद के निधन के साथ ही भारतीय क्रिकेट से अनुशासन का एक बड़ा अध्याय भी खत्म हो गया। वही अनुशासन जिसकी दुहाई टीम इंडिया में बार-बार दी जाती है....
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वही अनुशासन जिसने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव को सेक्टर-16 क्रिकेट स्टेडियम की सीढ़ियों पर बैठने पर मजबूर कर दिया और वही अनुशासन जिसने कुक्कू को सिखाया कि कैसे कपिल देव बना जाता है।

यही थे क्रिकेट के द्रोणाचार्य देश प्रेम आजाद। उनका नाता अनुशासन से पहले था और उससी मजबूती पाते थे क्रिकेट के गुर।

अमर उजाला चंडीगढ़ से आजाद साहब का नाता उस दिन से ही जुड़ गया जिस दिन सिटी ब्यूटीफुल में अखबार का प्रकाशन शुरू हुआ।

द्रोणाचार्य के अचूक तीर कालम के माध्यम से उन्होंने क्रिकेट की कई सच्चाइयों से पाठकों को रूबरू कराया।

यह मई की ही तो बात है। गुरुनानक पब्लिक स्कूल सेक्टर-36 के मैदान पर प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठा एक शख्स बार-बार अपने घुटनों पर हाथ फिराता है और फिर उठकर ट्रायल देने पहुंचे बच्चों को समझाने उनके बीच में पहुंच जाता।
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कोच सुखविंदर टिंकू की आवाज आती है....सर आप बैठ जाएं हम ट्रायल ले लेंगे। जैसे करंट सा लगता है....वो पलटते हैं तपाक से बोल पड़ते हैं- अरे यार.....मैदान मेरी जिंदगी है.....जब तक रहूंगा तब तक बैठूंगा नहीं।

यह है द्रोणाचार्य अवार्डी देशप्रेम आजाद की किलिंग इंस्टिंक्ट। बारिश हो या गर्मी...तीन बजे नहीं कि आजाद साहब पहुंच जाते थे मैदान में। अचानक मौत ने गले लगा लिया तो बच्चों को यही समझा गए मैं हूं या नहीं.....डटे रहना....तुम ही कपिल हो और तुम ही चेतन।

क्रिकेट की फील्ड में कोई उन्हें सर कहता तो कोई आजाद साहब। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने अपने इस गुरू को जब सीधे दिल से (स्ट्रेट फ्राम द हार्ट) लिखा तो यही लिखा.....वो शख्स न थमता है न रुकता है....वही है जो अनुशासन का सही मायने जानता है और अनुशासन ही है जिसने हमको बना दिया।

पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव एमपी पांडव का समय तो उनके साथ ही गुजरा। तीन दिन पहले ही आजाद साहब एमपी पांडव से मिलने पहुंचे। उनके रूम में बैठे। क्रिकेट के बारे में ही चर्चा की।

पीसीए की अंडर-14 नान रेजीडेंशियल अकादमी के चीफ कोच कम निदेशक थे तो नए सेशन के लिए उसी पर चर्चा की। फिर बोले, जरा पीछे प्रेक्टिस फील्ड की ओर जाकर ही लौटूंगा। एमपी पांडव कहते हैं रणजी ट्राफी में आजाद साहब ने कुछ वक्त उनके साथ खेला।

महाराजा आफ पटियाला एकादश, सदर्न पंजाब के लिए अंडर-19 टीम में खेलने वाले देशप्रेम आजाद का क्रिकेट कैरियर कम रहा लेकिन उनको कोचिंग में रुचि ज्यादा रही। एनआईएस से ट्रेनिंग के बाद वो चंडीगढ़ आ गए।

कपिल देव, योगराज, चेतन शर्मा, अशोक मल्होत्रा जैसे क्रिकेटरों के गुरु बने और चेलों को ऐसा सिखाया कि वह दुनियाभर की शान बन गए।

पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव एमपी पांडव ने कहा कि क्रिकेट की दुनिया में कई कोच आते जाते हैं पर देश प्रेम आजाद एक ऐसी क्रिकेट को जानते थे जो कि बच्चों को सिर्फ क्रिकेट नहीं बल्कि अनुशासन सिखाता था।

उनकी कमी जरूर महसूस होगी। आजाद साहब को पीसीए ने अपनी नर्सरी डवलप करने का जिम्मा दिया था। वो क्रिकेट के बेसिक्स में ज्यादा ध्यान देते थे।

इसीलिए उनको पीसीए की नान रेजीडेंशियल क्रिकेट अकादमी का चीफ कोच कम डायरेक्टर नियुक्त किया गया था। एमपी पांडव ने कहा कि क्रिकेट के इस पुरोधा के निधन के बाद कोचिंग की दुनिया में अंधेरा छा गया है।
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