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'युवराज' के पदचिह्नों पर चले 'कमल', कैंसर से जंग जीतकर रणजी के डेब्यू मैच में जड़ा शतक

Sat, 15 Feb 2020 04:10 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला

सार

  • 15 साल की उम्र में हुआ था कैंसर
  • एक साल तक रहे क्रिकेट से दूर
  • रणजी ट्रॉफी के डेब्यू मैच में महाराष्ट्र के खिलाफ ठोका शतक
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कमल सन्याल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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18 वर्षीय क्रिकेटर कमल कन्याल एक बार फिर से चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वो रणजी के डेब्यू मैच में शतक जड़ने की वजह से सुर्खियां बटोर रहे हैं। उत्तराखंड के युवा क्रिकेटर कमल इसलिए भी चर्चा में हैं क्योंकि उन्होंने मौत से जंग लड़कर ना सिर्फ क्रिकेट के मैदान पर वापसी की बल्कि एक मजबूत टीम के खिलाफ शतकीय पारी खेलकर सभी का दिल भी जीत लिया।  

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युवराज सिंह से होती है तुलना

कमल की तुलना टीम इंडिया के दिग्गज क्रिकेटर और वर्ल्ड कप जिताने वाले युवराज सिंह से होती है, क्योंकि दोनों की ही कहानी लगभग एक सी ही है. दरअसल भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज युवराज सिंह की जिंदगी और मौत से जंग की कहानी लगभग हर क्रिकेट फैन जानता है। टीम को मुश्किल वक्त से बाहर निकालकर जीत दिलाने वाले युवराज ने कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को हराया था। उन्होंने मौत के मुंह से निकलकर फिर से टीम में वापसी की थी और मैच जिताऊ पारियां खेली थीं।  

अब उत्तराखंड के कमल ने भी युवराज की राह पर चलते हुए ना सिर्फ कैंसर को हराया बल्कि क्रिकेट के मैदान में उतरते ही शतक जड़ दिया। 18 वर्षीय कमल कन्याल ने गुरुवार को महाराष्ट्र के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में डेब्यू करते हुए पहला शतक जड़ा। उन्होंने 17 चौके की मदद से 160 गेंदों में 101 रन की पारी खेली।

15 साल की उम्र में कैंसर

उत्तराखंड के हल्द्वानी से आने वाले कमल को तीन साल पहले यानी 15 साल की उम्र में पता चला था कि उन्हें लयूकेमिया (ब्लड कैंसर) है और उनके प्लेटलेट्स लगातार कम हो रहे हैं। इसके बाद कमल एक साल तक क्रिकेट के मैदान से दूर हो गए थे और नोएडा में अपना इलाज करवा रहे थे। 

पिता सेना से सेवानिवृत्त हैं

कमल कन्याल मूल रूप से ऊधमसिंह नगर जिले के सितारगंज के ग्राम नलई के रहने वाले हैं। उनके पिता उमेश कन्याल भारतीय सेना की सेकंड कुमाऊं रेजिमेंट बटालियन से सेवानिवृत्त हैं। अब परिवार समेत गौलापार के कुंवरपुर में रहते हैं। वह हल्द्वानी के केंद्रीय विद्यालय में इंटर के छात्र हैं। 
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हार नहीं मानी

कमल कन्याल ने 2013-14 में क्रिकेट खेलना शुरू किया। बाएं हाथ के टॉप आर्डर बल्लेबाज कमल को करीब एक साल बाद ब्लड कैंसर का पता चला। बीमारी का पता चलने के बाद परिवार ने मुश्किल से नोएडा में इलाज कराया। इस दौरान करीब एक साल तक कमल क्रिकेट से दूर रहे। बीमारी ठीक होने के बाद उन्होंने क्रिकेट में वापसी की और 2018 में वीनू मांकड़ ट्रॉफी में स्थान पक्का किया। इस दौरान उन्होंने एक अर्द्धशतक भी लगाया।  
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