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Javed Miandad: भारत के खिलाफ टिप्पणी पर मियांदाद ने दी सफाई, बोले- दुनिया भर में पड़ोसी आपस में खेलते हैं

Thu, 09 Feb 2023 05:04 PM IST
रोहित राज स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एशिया कप की मेजबानी पाकिस्तान छिननी तय है। यह टूर्नामेंट यूएई में आयोजित हो सकता है। एक तरफ बीसीसीआई अपनी टीम को पाकिस्तान भेजने के लिए तैयार नहीं है तो दूसरी ओर पीसीबी मेजबानी को लेकर आमादा है।
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जावेद मियांदाद - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आगामी एशिया कप के लिए भारतीय टीम पाकिस्तान का दौरा नहीं करना चाहती। इसे लेकर पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट एक्सपर्ट लगातार भारत के खिलाफ के खिलाफ बयान दे रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व कप्तान जावेज मियांदाद ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, ''मैं तो पहले भी कहता था, नहीं आते तो भाड़ में जाएं। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।'' अपने इस बयान मियांदाद ने अब सफाई दी है।
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मियांदाद ने कहा कि उनके कहने का मतलब गलत निकाला गया। उन्होंने कहा, ''आप जानते हैं कि भाड़ का मतलब क्या होता है? अगर आपको यहां नहीं खेलना है तो मत खेलो। इससे हमें कोई परेशानी नहीं है। अगर आप इस मसले पर दोनों देशों के खिलाड़ियों से पूछेंगे तो वो कहेंगे कि दोनों टीमों के बीच मैच होनी चाहिए। इसका फायदा दोनों देशों को होगा।''

मियांदाद ने आगे क्या कहा?
मियांदाद ने आगे कहा, ''भारत को अगर ऐसा लगता है कि उनके पाकिस्तान नहीं आने से कोई फर्क पड़ेगा तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। पाकिस्तान ने क्रिकेट से लेकर हॉकी तक में कई दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं। दुनिया भर में पड़ोसी आपस में खेलते हैं।'' मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एशिया कप की मेजबानी पाकिस्तान छिननी तय है। यह टूर्नामेंट यूएई में आयोजित हो सकता है। एक तरफ बीसीसीआई अपनी टीम को पाकिस्तान भेजने के लिए तैयार नहीं है तो दूसरी ओर पीसीबी मेजबानी को लेकर आमादा है।
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मियांदाद ने क्या टिप्पणी की थी?
मियांदाद ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) द्वारा भारत को बाहर कर देना चाहिए। मियांदाद ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, ''मैं तो पहले भी कहता था, नहीं आते तो भाड़ में जाएं। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें हमारी क्रिकेट मिल रही है। ये आईसीसी का काम है। ये चीजें अगर आईसीसी कंट्रोल नहीं कर सकती तो फिर गवर्निंग बॉडी का कोई काम नहीं है। हर देश के लिए आईसीसी का एक नियम होना चाहिए। अगर ऐसी टीमें नहीं आती हैं, चाहे वे कितनी भी मजबूत क्यों न हों, आपको उन्हें हटा देना चाहिए।''
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