बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन इस्तीफा भी नहीं दें और किसी के रहते हुए पद पर भी बने रहे हैं। बोर्ड के संविधान पर नजर डालें तो ऐसा संभव नहीं था।
अध्यक्ष पद पर दो व्यक्तियों के रहने का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन बोर्ड उपाध्यक्ष अरुण जेटली के दिमाग ने यह भी संभव कर दिखाया।
श्रीनिवासन के स्थान पर जगमोहन डालमिया को जिम्मेदारी सौंप तो दी गई है लेकिन उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष या फिर अंतरिम अध्यक्ष जैसे पद का नाम नहीं दिया गया है।
बोर्ड की ओर से ऐसा कानूनी अड़चनों से बचने के लिए किया गया है। बोर्ड के संयुक्त सचिव अनुराग ठाकुर की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में साफ लिखा गया है कि श्रीनिवासन के स्थान पर डालमिया बोर्ड का कार्यभार संभालेंगे। इसमें कहीं भी उन्हें अंतरिम अध्यक्ष नहीं दर्शाया गया है।
बैठक में भी कुछ लोगों ने यही सवाल उठाए थे। लेकिन उन्हें भी यही समझाया गया। बैठक में यह भी कहा गया है कि फिर डालमिया श्रीनिवासन के स्थान पर किस हैसियत में काम करेंगे।
इस पर कहा गया है कि वह वर्किंग कमेटी के साथ बोर्ड के कार्यों को निपटाएंगे। वर्किंग कमेटी 15 दिनों में उनके ओर से लिए गए निर्णयों की समीक्षा भी करेगी।
--1979 में पहली बार बीसीसीआई से जुड़े।
--1997 में आईसीसी का अध्यक्ष चुने गए।
--2000 में आईसीसी अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा।
--2001 में बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर काबिज।
--2004 में अपने पसंदीदा रणबीर सिंह महेंद्रा को अध्यक्ष बनवाया।
--2006 में मुंबई में आर्थिक धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ, कैब अध्यक्ष का पद गंवाया।