टेस्ट मैच जीतने का सिर्फ एक ही नियम है... जीतने के लिए सामने वाली टीम के सभी 20 खिलाड़ियों को आउट करना जरूरी है। किसी भी टीम के बल्लेबाज कितना भी रन बना ले, कोई फर्क नहीं पड़ता जब तक कि टीम के गेंदबाज अपना प्रदर्शन न कर पाएं। शायद यही कहानी टीम इंडिया के साथ रही है। टीम इंडिया में कभी भी गेंदबाजों की ऐसी फौज नहीं रही है जो सामने वाली टीम को आसानी से आउट कर सके।
भारतीय टीम विपक्षी टीमों को ज्यादातर मौकों पर स्पिन ट्रैक पर उलझा कर हराया है। 22 फरवरी से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में टीम इंडिया के गेंदबाजों के सामने चुनौती यह होगी कि वो कंगारू बल्लेबाजों को दो पारियों में ऑल आउट कर पाएं। आइए डालते हैं पहले दो टेस्ट में शामिल गेंदबाजों पर एक नजर---
इशांत शर्मा
जहीर खान के अनफिट होने के बाद इशांत शर्मा टीम इंडिया के मुख्य तेज गेंदबाज होंगे। भारतीय टीम का तेज गेंदबाजी आक्रमण इशांत की अगुवाई में कंगारुओं का शिकार करेगी। हालांकि खुद इशांत इस समय आउट ऑफ फॉर्म चल रहे हैं। उनके कैरियर पर नजर डालें तो इशांत ने 47 टेस्ट मैचों में 38.00 की औसत से 137 विकेट झटके हैं। जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इशांत ने 12 टेस्ट मैचों में 45.51 की औसत से 29 विकेट झटके हैं। मतलब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनका प्रदर्शन उनके कैरियर से बेहतर नहीं रहा है।
अशोक डिंडा करेंगे डेब्यू
इस्ट जोन और आईपीएल खेलने वाले अशोक डिंडा फिलहाल वनडे मैंचों में टीम इंडिया का हिस्सा रह चुके हैं। डिंडा को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में मौका मिला है। अशोक डिंडा ने 13 वनडे मैचों में 51 की औसत से 12 विकेट झटके हैं। अब तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि डिंडा टेस्ट मैचों में अपनी प्रतिभा को किस तरह दिखाते हैं।
भुवनेश्वर कुमार करेंगे डेब्यू
प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने 2008-09 के रणजी फाइनल में सचिन तेंदुलकर को घरेलू क्रिकेट में पहली बार शून्य पर आउट कर खूब सुर्खियां बटोरीं थी। घरेलू मैदानों पर पाकिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैचों में भुवनेश्वर कुमार ने बेहतरीन गेंदबाजी की है। भुवनेश्वर को टेस्ट टीम में पहली बार रखा गया है। भुवनेश्वर ने 8 वनडे मैचों में 35 के औसत से 9 विकेट झटके हैं।
हरभजन सिंह
एक जमाने में टीम इंडिया के मुख्य स्पिनर की भूमिका निभा चुके हरभजन सिंह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में कंगारुओं के खिलाफ अपने पुराने रिकॉर्ड के दम पर शामिल हुए हैं। हरभजन सिंह घरेलू मैदानों पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वो करिश्मा फिर दोहरा पाएंगे, यह देखना रोचक होगा। भज्जी ने अपने कैरियर में 99 टेस्ट मैचों के दौरान 408 विकेट झटके हैं। जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 16 टेस्ट मैचों में भज्जी के नाम 90 विकेट हैं।
आर. अश्विन
महेंद्र सिंह धोनी आर. अश्विन को टीम का मुख्य स्पिनर मानते हैं। हालांकि अश्विन ने आईपीएल में जो प्रदर्शन किया है उसके बराबर प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मैचों में वो नहीं कर पाए हैं। अश्विन ने अब तक 12 टेस्ट मैच खेले हैं। इस दौरान अश्विन ने 32.41 की औसत से 63 विकेट झटके हैं। जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 टेस्ट मैचों में 62.77 की औसत से अश्विन ने 9 विकेट अपने नाम किए हैं। मतलब कंगारू बल्लेबाजों ने अश्विन की जमकर धुनाई की है।
प्रज्ञान ओझा
प्रज्ञान ओझा लगभग 4 साल से टीम इंडिया से जुड़े हुए हैं लेकिन उन्हें इस दौरान कम ही मौके मिले हैं जहां वो अपने आप को साबित कर पाएं। प्रज्ञान ओझा 20 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम से खेलते हुए 31.62 की औसत से 95 विकेट झटके हैं। जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2 टेस्ट मैच में ओझा ने 38.77 की औसत से 9 विकेट अपने नाम किए हैं।
अगर सभी गेंदबाजों के रिकॉर्ड पर गौर करें तो केवल हरभजन सिंह ही कंगारू बल्लेबाजों पर अपना दबदबा बनाते दिख रहे हैं। लेकिन रिकॉर्ड तो इतिहास की बात हो चुकी है, ऐसे में क्या टीम इंडिया के यह गेंदबाज कंगारू बल्लेबाजों पर शिकंजा कस पाएंगे? यह देखना रोचक होगा। क्या है आपकी राय?