फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोच्चि टस्कर्स ने BCCI के खिलाफ जीता मुकदमा, भरना होगा इतने करोड़ का हर्जाना

Tue, 24 Oct 2017 05:17 PM IST
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा
विज्ञापन
बीसीसीआई - फोटो : getty
विज्ञापन
आईपीएल फ्रेंचाइजी कोच्चि टस्कर्स मामले पर बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोच्चि टस्कर्स ने बीसीसीआई के खिलाफ आर्बिट्रेशन का केस जीत लिया है। केस जीतने के बाद कोच्चि टस्कर्स ने अब हर्जाने के तौर पर बीसीसीआई से 850 करोड़ की मांग की है। मंगलवार को हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह मांग की गई है। 
विज्ञापन


गौरतलब है कि 2011 में बीसीसीआई ने कोच्चि टस्कर्स केरला को निलंबित कर दिया था, क्योंकि यह फ्रेंचाइजी 156 करोड़ रुपए के सालाना भुगतान की बैंक गारंटी देने में नाकाम रही थी। इसके बाद कोच्चि टस्कर्स फ्रेंचाइजी ने 2011 में ही हाई कोर्ट में बीसीसीआई के खिलाफ आर्बिट्रेशन दायर की थी।

पढ़ेंः- टीम इंडिया का दुलारा दिव्यांग धर्मवीर अब बाउंड्री पर नहीं दिखेगा

इस मामले में आर सी लाहोटी की अध्यक्षता वाली पैनल ने बीसीसीआई को मुआवजे के तौर पर 550 करोड़ रूपये चुकाने के निर्देश दिए थे और ऐसा नहीं करने पर सालाना 18 प्रतिशत दंड लगाया जाना था। पिछले दो साल से बीसीसीआई ने ना तो मुआवजा चुकाया और ना ही टीम को आईपीएल में वापस लिया।
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

कोच्चि टस्कर्स - फोटो : indian express
बता दें कि इस फ्रेंचाइजी खरीदने के लिए उसके मालिकों को अहमदाबाद, ग्वालियर, नागपुर, और राजकोट की कंपनियों से कड़ी मिली थी। रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड ने 1550 करोड़ की रकम में कोच्चि टस्कर्स केरला फ्रेंचाइजी हासिल की थी। कोच्चि टस्कर्स के मालिकों ने 2015 में बीसीसीआई के खिलाफ मामला जीता था, जिसमें अनुबंध के उल्लंघन को लेकर बैंक गारंटी भुनाने के बीसीसीआई के फैसले को चुनौती दी गई थी।

हालांकि इस मामले में आईपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला ने बैठक के बाद कहा, ‘ कोच्चि टस्कर्स ने 850 रूपये मुआवजा मांगा है। हमने आईपीएल की संचालन परिषद की बैठक में इस पर चर्चा की। अब मसला आमसभा की बैठक में रखा जाएगा। वे फैसला लेंगे लेकिन मामले पर बातचीत की जरूरत है।'

आईपीएल संचालन परिषद के एक सदस्य ने कहा, ‘हमें कोच्चि को मुआवजा देना होगा। इस मामले में सभी कानूनी विकल्पों पर चर्चा हो चुकी है। यदि आर्बिट्रेशन का फैसला हमारे पक्ष में नहीं आता है तो ऐसे में इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना बेवकूफी होगी।'
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें