राइजिंग पुणे सुपरजाइंटस की टीम रविवार को जब मोहाली में किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ भिड़ेगी तो कप्तान धोनी का मकसद अपनी अंतिम एकादश का बेहतर संयोजन स्थापित करना भी होगा। आईपीएल-9 में नवप्रवेशी सुपरजाइंटस की टीम अभी तक दो में से एक मैच जीती है और एक में उसे हार का सामना करना पड़ा है। दूसरी ओर, पंजाब की टीम अपने दोनों शुरुआती मुकाबले गंवा बैठी है।
अभी चूंकि लीग का पहला हफ्ता पूरा हुआ है इसलिए दोनों टीमों का मकसद लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को बेहतर करने का होगा। सीमित ओवरों के फारमेट में भारतीय कप्तान धोनी की यह खासियत रही है कि अपना टीम संयोजन लेकर चलते हैं। टी-20 विश्व कप में भी विशेषज्ञों की आलोचनाओं के बावजूद वह अपने संयोजन को लेकर अडिग रहे थे।
चेन्नई सुपरकिंग्स में अलग परिदृश्य था जहां वह नीलामी में ही खिलाड़ी चुन लिए थे और यही उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन का कारण भी रहा है लेकिन पुणे में धोनी को अभी सही संयोजन की तलाश है। आरपी सिंह कभी धोनी के पसंदीदा गेंदबाज थे लेकिन अब वह वैसे गेंदबाज नहीं हैं जैसे 2007-08 में हुआ करते थे। इसी तरह सीमित ओवरों की क्रिकेट में पेसर इशांत शर्मा के प्रदर्शन में भी निरंतरता का अभाव रहता है।
धोनी के पास इरफान पठान और ईश्वर पांडेय के विकल्प हैं। इसी तरह पिछले कुछ समय से ऑफ स्पिनर अश्विन भी प्रतिष्ठा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं लेकिन तमिलनाडु के ही मुरुगन अश्विन अपने पहले आईपीएल सीजन में प्रभावित कर रहे हैं। बल्लेबाजी में फाफ डू प्लेसिस के अलावा अन्य बल्लेबाज गुजरात लायंस के खिलाफ बेहतर नहीं कर पाए थे।
किंग्स इलेवन की दिक्कत यह है कि उसके विदेशी खिलाड़ी ग्लेन मैक्सवेल और कप्तान डेविड मिलर खास नहीं कर पा रहे हैं। 2014 में जब किंग्स इलेवन का प्रदर्शन अच्छा रहा था तब मैक्सवेल ने 552 रन और मिलर ने 446 रन बनाए थे। मुरली विजय अब वैसे टी-20 खिलाड़ी नहीं रहे जैसे वह तब थे जब चेन्नई सुपरकिंग्स टीम में थे। मनन वोहरा अच्छे बल्लेबाज हैं लेकिन क्वालिटी गेंदबाजों के सामने वह उतने प्रभावशाली नहीं दिखते।
गेंदबाजी में टीम मिचेल जानसन पर निर्भर है लेकिन रिटायर होने के बाद टी-20 में उनसे बहुत अच्छी अपेक्षाएं नहीं की जा सकती। संदीप शर्मा अच्छे गेंदबाज हैं लेकिन उनके पास ज्यादा गति नहीं है।