बांबे हाईकोर्ट ने पानी संकट से जूझ रहे महाराष्ट्र में आईपीएल मैचों को लेकर सख्त फैसला लेते हुए 30 के बाद से यहां होने वाले शेष मैचों को बाहर कराने का आदेश दिया है। पानी संकट के कारण महाराष्ट्र में आईपीएल मैचों को लेकर बने संशय के बीच फ्रेंचाइजी टीमों ने पानी के इस्तेमाल के बदले में भुगतान करने की बात कही थी लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा।
कोर्ट ने महाराष्ट्र में आईपीएल के नौंवें संस्करण के खेले जाने वाले 20 मैचों की मेजबानी को लेकर फैसला दे दिया है और 30 अप्रैल तक के 7 मैचों के आयोजन पर कोई रोक नहीं लगाई, लेकिन उसके बाद के मैच को कहीं और शिफ्ट करने का निर्देश दे दिया। उसके इस फैसले के बाद 20 में से फाइनल मैच समेत 13 मैच जो मई में महाराष्ट्र में ही खेले जाने थे उसे अब कहीं और कराने होंगे। पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार 29 अप्रैल को मुंबई के वानखेड़े में ही फाइनल मैच खेला जाना था।
इस फैसले के बाद अब मई में एक भी आईपीएल के मैच महाराष्ट्र में नहीं खेला जाएगा। आयोजकों को अब जिन 13 मैचों के आयोजन स्थल को लेकर फिर से विचार करना होगा उसमें 6 मैच पुणे (2 नॉकआउट मैच), 4 मुंबई और 3 नागपुर में खेले जाने थे। बीते 9 अप्रैल को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में हुए आईपीएल मैच के आगाज के साथ 29 मई तक मुंबई, पुणे और नागपुर में कुल 20 मैच होना तय हुआ था। इसमें से 8 मैच मुंबई में, 9 मैच पुणे में और 3 मैच नागपुर में होना था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सिर्फ 7 मैच ही महाराष्ट्र में हो सकेगा।
महाराष्ट्र में सूखे के चलते पानी की विकट समस्या है। इसके चलते आईपीएल मैचों का विरोध हो रहा था। इस पर सुनवाई करते हुए यायमूर्ति वीएम कानडे व न्यायमूर्ति एमएस कर्णिक की खंडपीठ ने कहा कि राज्य में जल संकट की स्थिति में अदालत लाखों लोगों की परेशानी से मुंह नहीं मोड़ सकती। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को संज्ञान में लिया है।
कोर्ट ने कहा कि हमे अपेक्षा थी कि आईपीएल की फ्रेंचाइजी किग्स इलेवन पंजाब की तरह अन्य फ्रेंचाइजी खुद महाराष्ट्र में होने वाले आईपीएल मैचों को दूसरी जगह शिफ्ट करने पर विचार करेगी, किंतु ऐसा नजर नहीं आ रहा खंडपीठ ने कहा कि हमने बीसीसीआई को काफी अवसर दिया कि वह खुद इस पर विचार करे लेकिन आईपीएल का रूतबा कम होने और आय प्रभावित होने की दलील दी जा रही है। हमें ऐसी अपेक्षा नहीं थी। खंडपीठ ने क्रिकेट मैच के रखरखाव के लिए पानी का जिमा महानगरपालिका को सौंपे जाने को लेकर सरकार पर सवाल उठाया।
बीसीसीआई के पास हालांकि बांबे हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है। देखना यह होगा कि क्या बोर्ड वाकई सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा? हालांकि हाल ही दिनों में बीसीसीआई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के मद्देनजर उसके हाईकोर्ट के फैसले को पलटने की उम्मीद कम ही दिखाई देती है।