रिकेल्टन को अंपायर ने वापस बुलाया
इसके बाद रिकेल्टन लगभग डगआउट में पहुंच गए थे, लेकिन वहां चौथे अंपायर ने उन्हें रोका। फिर थर्ड अंपायर ने क्लासेन का ग्लव्स चेक किया और उसे नो बॉल दिया गया। दरअसल, अंपायर ने पाया कि जब गेंद फेंकी गई तब हैदराबाद के विकेटकीपर क्लासेन का हाथ स्टंप्स के बगल में था। एमसीसी के नियम 27.3 के मुताबिक, गेंद को फेंके जाने तक विकेटकीपर का हाथ विकेट के पीछे होना चाहिए। ऐसे में नो बॉल दिया गया और रिकेल्टन को जीवनदान मिला। रिकेल्टन ने 23 गेंद में पांच चौके की मदद से 31 रन की पारी खेली। इस जख्म पर नमक तब लगा जब नो बॉल के लिए फ्री हिट भी दिया गया।
वरुण ने नियम पर सवाल खड़े किए
भारत और कोलकाता नाइट राइडर्स के दिग्गज स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने अपनी राय साझा करते हुए इस मामले पर कहा कि नियम में कुछ बदलाव होने चाहिए। उन्होंने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट में लिखा, 'अगर विकेटकीपर के दस्ताने स्टंप के सामने आते हैं तो यह डेड बॉल होनी चाहिए और विकेटकीपर को चेतावनी देनी चाहिए ताकि वह दोबारा ऐसा नहीं करे!! नो बॉल और फ्री हिट नहीं !! गेंदबाज ने क्या किया। मैं इस मामले पर गहन विचार कर रहा हूं!! आप सभी क्या सोचते हैं???'