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Virat Kohli-Captaincy: 'खुश रहने के लिए...', कोहली ने भारत और RCB की कप्तानी छोड़ने के फैसले पर तोड़ी चुप्पी

Tue, 06 May 2025 03:21 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विराट कोहली ने आरसीबी के पॉडकास्ट में अपनी कप्तानी को लेकर खुलकर बातचीत की। उनका नाम फिलहाल अवनीत कौर की इंस्टाग्राम पर तस्वीर लाइक करने की वजह से चर्चा में है। कोहली ने कहा कि कप्तानी छोड़ी ताकि खुश रह सकूं।
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विराट कोहली - फोटो : PTI
विराट कोहली ने साल 2021 में भारतीय टीम और फिर बाद में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की कप्तानी छोड़ने के फैसले को लेकर चार साल बाद चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने लगभग एक दशक तक देश का और आईपीएल में अपनी फ्रेंचाइजी आरसीबी का नेतृत्व किया। हालांकि, 2021 में अचानक से कोहली ने पहले तो भारतीय टी20 टीम की और फिर आरसीबी की कप्तानी छोड़ दी थी। फिर उन्हें वनडे की कप्तानी से भी हटा दिया गया था। कोहली ने कहा कि फॉर्म में नहीं होने की वजह से उनकी बल्लेबाजी पर निगरानी रखी जा रही थी। तब उन्होंने सोचा कि अब बहुत हो गया और उन्होंने जिंदगी में खुश रहने के लिए आखिर में कप्तानी छोड़ने का फैसला किया। कुछ महीने बाद ही कोहली ने दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद टेस्ट की कप्तानी भी छोड़ दी थी।
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विराट कोहली और अवनीत कौर - फोटो : ANI/avneet kaur instagram
'ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो रहा था'
कोहली ने कहा कि वह अपने करियर में एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गए थे जहां लगातार ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो गया था। उन्होंने ये बातें 'आरसीबी बोल्ड डायरीज' पॉडकास्ट में मयंती लैंगर से बातचीत करते हुए कही हैं। कोहली का नाम फिलहाल अवनीत कौर की इंस्टाग्राम पर तस्वीर लाइक करने की वजह से चर्चा में है। हालांकि, वह इस मामले पर सफाई दे चुके हैं। इसी कड़ी में उन्होंने पॉडकास्ट में अपनी कप्तानी को लेकर खुलकर बातचीत की।
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विराट कोहली - फोटो : IPL/BCCI
'कभी कप्तानी तो कभी बल्लेबाजी में संघर्ष कर रहा था'
कोहली ने कहा, 'एक समय ऐसा आया जब कप्तानी मेरे लिए बहुत मुश्किल हो गया था। तब मेरे करियर में काफी कुछ घटित हो रहा था। मैं सात-आठ साल से भारत की कप्तानी कर रहा था। मैंने नौ साल तक आरसीबी की कप्तानी की। मैं जो भी मैच खेलता उसमें बल्लेबाजी में मुझसे काफी उम्मीद की जाती थी। मुझे तब इस बात का एहसास नहीं था कि मैं किसी भी काम में ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा हूं। अगर कप्तानी में संघर्ष नहीं कर रहा होता था तो बल्लेबाजी में संघर्ष कर रहा होता था। मैं हर समय इसके बारे में सोचता था। यह मेरे लिए काफी मुश्किल हो गया था और आखिर में यह मुझ पर बहुत अधिक हावी हो गया था।'

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विराट कोहली-जैकब बेथेल - फोटो : IPL/BCCI
'खेल में बने रहने के लिए खुश रहना जरूरी'
कोहली ने 2022 में क्रिकेट से एक महीने का ब्रेक लिया था और उस दौरान उन्होंने बिल्कुल बल्ला नहीं छुआ था। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया था जब वह निजी जीवन में खुश रहने के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'इसलिए मैंने कप्तानी छोड़ दी क्योंकि मुझे लगा अगर मुझे इस खेल में बने रहना है तो उसके लिए मेरा खुश रहना जरूरी है।' उन्होंने कहा, 'मुझे अपने जीवन में एक ऐसी जगह की जरूरत थी जहां मैं सहज होकर रह सकूं और अपना क्रिकेट खेल सकूं। बिना किसी आलोचना के, बिना यह देखे कि आप इस सत्र में क्या करने जा रहे हैं और आगे क्या होने वाला है मैं अपना ध्यान पूरी तरह क्रिकेट पर लगा सकूं।'
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कोहली और धोनी - फोटो : PTI
'अंडर-19 विश्व कप के बाद धोनी-कर्स्टन ने की मदद'
भारत को अंडर-19 विश्व कप में खिताबी जीत दिलाने से किसी को सीनियर टीम में आसानी से एंट्री नहीं मिलती है और न ही इसकी कोई गारंटी है। हालांकि, कोहली को अंडर-19 विश्व कप 2008 जीतने के तुरंत बाद ही भारतीय टीम में ब्रेक मिला था। उन्होंने कहा कि यह उनका दृढ़ संकल्प और तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और कोच गैरी कर्स्टन का समर्थन था, जिसने उन्हें टीम में नंबर तीन स्थान सुरक्षित करने में मदद की।
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कोहली और धोनी - फोटो : ANI
'धोनी और कर्स्टन ने तीसरे नंबर पर जगह पक्की की'
कोहली ने कहा, 'मैं अपनी क्षमता को लेकर बहुत यथार्थवादी था क्योंकि मैंने कई अन्य लोगों को खेलते हुए देखा था। मुझे ऐसा नहीं लगा कि मेरा खेल कहीं भी उनके करीब था। मेरे पास केवल दृढ़ संकल्प था। अगर मैं अपनी टीम को जीत दिलाना चाहता था, तो मैं कुछ भी करने को तैयार था। यही कारण था कि मुझे शुरुआत में भारत के लिए खेलने का मौका मिला। गैरी (कर्स्टन) और एमएस (धोनी) ने मुझे यह स्पष्ट कर दिया कि तीसरे नंबर पर मेरी जगह पक्की है।'
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विराट कोहली, रोहित शर्मा और धोनी - फोटो : ANI
'मैं कभी हार नहीं मानने वाला खिलाड़ी हूं'
कोहली ने कहा कि इन दोनों ने उन्हें अपना स्वाभाविक खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, 'इन दोनों ने मुझसे कहा आप मैदान पर जो भी करते हैं, आपकी ऊर्जा, आपकी प्रतिबद्धता, वह हमारे लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। हम चाहते हैं कि आप अपना स्वाभाविक खेल खेलें। मुझे कभी पूर्ण मैच विजेता के रूप में नहीं देखा गया जो कहीं से भी खेल का रुख बदल सकता है, लेकिन मैं कभी हार नहीं मानता था। इसी जज्बे का धोनी और कर्स्टन ने समर्थन किया था।'
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