मु्ंबई की टीम लगातार सात मुकाबले हारकर प्लेऑफ की दौड़ से लगभग बाहर हो गई है। उसके अब नॉकआउट स्टेज में पहुंचने की उम्मीद ना के बराबर है। अगर वे अपने बाकी के सात मैच जीत भी जाते हैं तो भी उन्हें इसका अधिकर फायदा नहीं होगा। उन्हें प्लेऑफ की रेस में पहुंचने के लिए सबसे पहले सभी मैच जीतने होंगे और वह भी बड़े अंतर से क्योंकि उनका रनरेट इस वक्त निगेटिव में है।
मुंबई की टीम अगर अपने बाकी के सभी मुकाबले बड़े अंतर से जीत भी जाती है तो भी उसे दूसरे टीमों के प्रदर्शन के भरोसे रहना होगा। सभी मैच जीतने की स्थिति में मुंबई के 14 अंक हो जाएंगे, लेकिन इस सीजन में 10 टीमें होने की वजह से यह प्लेऑफ के लिए काफी नहीं होगा। हालांकि वह अपनी जीत से बाकी टीमों की उम्मीदों को झटका दे सकती है।
चार बार की चैंपियन चेन्नई ने अभी तक सात में दो मुकाबले जीते हैं और चार अंकों के साथ नौवें स्थान पर है। उसका रनरेट भी मुंबई की तरह ही निगेटिव में है। ऐसे में उसे बाकी के सात मैचों में कम से कम छह मुकाबले जीतने होंगे और वह भी बड़े अंतर से। टीम को अंकों के साथ-साथ अपना रन रेट भी सुधारना होगा।
रवींद्र जडेजा की कप्तानी वाली सीएसके अगर अपने बाकी के सभी सातों मैच जीत जाती है तो उस स्थिति में उसके 18 अंक हो जाएंगे और तब प्लेऑफ के लिए उसकी राह आसान हो सकती है। हालांकि, मौजूदा स्थिति और बाकी की टीमों के प्रदर्शन को देखते हुए चेन्नई के लिए जीत बेहद कठिन होगी। 10 टीमों के साथ खेली जा रही लीग में प्लेऑफ के लिए काफी संघर्ष देखने को मिलेगा क्योंकि अभी टूर्नामेंट में काफी मुकाबले खेले जाने हैं।