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IPL 2019: आखिरी जंग के लिए तैयार दिल्ली और चेन्नई, ये है दोनों की ताकत और कमजोरी

Fri, 10 May 2019 01:42 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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दिल्ली बनाम चेन्नई - फोटो : अमर उजाला
IPL सीजन 12 अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुका है। विशाखापट्टनम में शुक्रवार को चेन्नई और दिल्ली के बीच मैच से पता लग जाएगा कि रविवार को होने वाले फाइनल में मुंबई के साथ कौन सी टीम भिड़ेगी। 

युवा टीम दिल्ली और अनुभवी टीम चेन्नई का ये मुकाबला फाइनल से कम नहीं होगा लेकिन हर टीम की कुछ ताकत होती है और कुछ कमजोरियां भी। आइए एक नजर डालते हैं दोनों टीमों की ताकत और कमजोरियों पर-
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एमएस धोनी

चेन्नई की मजबूती

  1. टीम की सबसे बड़ी ताकत खुद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं। धोनी के होने से टीम के लिए चीजें बहुत आसान हो जाती हैं।
  2. टीम के पास इमरान ताहिर, हरभजन सिंह और रवींद्र जडेजा के रूप में बेहतरीन स्पिनर हैं जो उसके लिए सफलता की कुंजी साबित हुए हैं।
  3. टीम किसी एक खिलाड़ी पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं है। किसी ना किसी मैच में उसका कोई ना कोई खिलाड़ी चल निकलता है।
  4. ऑलराउंडर्स से सजी चेन्नई टीम कप्तान धोनी को गेंदबाजी में कई विकल्प देते हैं। आठवें और नौवें नंबर तक टीम के खिलाड़ी बल्लेबाजी कर सकते हैं।
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चेन्नई

चेन्नई की कमजोरियां

  1. चेन्नई के लिए सलामी बल्लेबाजी शुरू से समस्या बनी हुई है। टूर्नामेंट की शुरुआत में अंबाती रायुडू और शेन वॉटसन को मौका मिला, लेकिन नाकमयाब होने के बाद फाफ डू प्लेसिस को टीम में लाया गया। ऐसे में फाफ तो अपना काम बखूबी निभा रहे हैं लेकिन वॉटसन अभी संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। 2008 में मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे शेन वॉटसन 14 मुकाबलों में 258 रन ही बना पाए।
  2. टीम की सबसे बड़ी समस्या मध्य क्रम साबित हुआ है। चेन्नई के पास मध्य क्रम में इस समय कोई भी मजबूत खिलाड़ी धोनी के अलावा मौजूद नहीं है जो टीम को बड़े लक्ष्य तक ले जा सकें। ऐसे में ओपनिंग के बाद मुंबई की टीम चेन्नई के कमजोर मध्यक्रम का भी फायदा उठाना चाहेगी।
  3. धोनी और रैना को छोड़ दिया जाए तो ऐसा कोई बल्लेबाज नजर नहीं आया जो इन दोनों के असफल होने पर अपने कंधों पर जिम्मेदारी उठाए। रायुडू ने कुछ उम्मीद जगाई, लेकिन वह खरे नहीं उतरे।
  4. डेथ ओवर्स में कमजोर गेंदबाजी भी चेन्नई की समस्या रही है।

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दिल्ली कैपिटल्स - फोटो : pti

दिल्ली की मजबूती

  1. सलामी बल्लेबाज शिखर धवन शानदार फॉर्म में हैं और उनके जोड़ीदार पृथ्वी शॉ ने भी पिछले मैच में बेहतरीन पारी खेलकर वापसी की है।
  2. ऋषभ पंत किसी भी समय आक्रामक बल्लेबाजी करने में सक्षम हैं और कभी भी मैच का रुख बदलकर रख देते हैं। एलिमिनेटर में भी उन्होंने ऐसा ही करके दिखाया।
  3. श्रेयस अय्यर बतौर कप्तान अच्छे फैसले ले रहे हैं और लगातार रन बना रहे हैं।
  4. कागिसो रबाडा की गैरमौजूदगी का भी टीम पर ज्यादा असर नहीं दिखा और अन्य गेंदबाजों ने उनकी कमी नहीं खलने दी।
  5. दिल्ली के पास रिकी पोंटिंग और सौरव गांगुली जैसे अनुभवी पूर्व कप्तानों का साथ मौजूद है। 
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दिल्ली कैपिटल्स - फोटो : Social media

दिल्ली की कमजोरियां

  1. अच्छी साझेदारी होने के बाद गुच्छे में दो-तीन विकेट गंवा देना।
  2. टीम में ज्यादातर खिलाड़ी युवा है और अनुभव की कमी है। लक्ष्य के करीब पहुंचकर डगमगा जाना।
  3.  कई मौकों पर उनका जोश हावी हो जाता है और अनुभव की कमी खलने लगती है।
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