उम्रदराज खिलाड़ियों की फौज कही जाने वाली महेंद्र सिंह धोनी की टीम फाइनल तक पहुंची। रोहित शर्मा की कप्तानी में मुंबई को लगातार अच्छे प्रदर्शन का फल मिला। धोनी का फाइनल में रनआउट होना फाइनल का टर्निंग प्वाइंट बन गया लेकिन इससे पहले ग्रुप मैचों में ये धोनी ही थे जिनके प्रदर्शन से टीम अंक तालिका में शीर्ष पर जगह बनाने में कायम रही थी।
पंजाब प्लेऑफ में नहीं पहुंच सकी लेकिन राहुल ने 593 रन बनाए और वह डेविड वॉर्नर (692) के बाद सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर रहे। हार्दिक एक बार फिर ‘गेम चेंजर ’ या ‘एक्स फैक्टर’ बनकर उभरे। उन्होंने 191 से अधिक की स्ट्राइक रेट से 402 रन बनाए, 14 विकेट लिए और 11 कैच लपके।
मुंबई के कप्तान हिटमैन रोहित का सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर 67 रहा लेकिन 400 से ऊपर रन बनाकर उन्होंने अपनी लय जरूर कायम रखी। दिल्ली कैपिटल्स की टीम दूसरे क्वालिफायर तक पहुंचने में सफल रही जिसमें ओपनर शिखर धवन का योगदान प्रमुख रहा जिन्होंने 16 मैचों में 521 रन बनाए और शीर्ष पांच बल्लेबाजों में शामिल रहे।
टीम प्रबंधन मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह के कार्यभार को लेकर चिंतित होगा लेकिन दोनों ने 19-19 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित कर दी। फाइनल में मैन ऑफ द मैच रहे बुमराह ने 14 रन देकर दो विकेट लिए।
टूर्नामेंट से पहले कलाई के स्पिनरों कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल को लेकर काफी हाइप बनाई गई थी लेकिन कुलदीप यादव को नौ मैच के बाद कोलकाता नाइटराइडर्स ने खराब फॉर्म के कारण मौका नहीं दिया। विराट कोहली की कप्तानी वाली बैंगलोर प्लेऑफ में नहीं पहुंच सकी लेकिन कप्तान कोहली ने 14 मैचों में 464 रन बनाए जिसमें एक शतक और दो अर्द्धशतक शामिल थे।
स्पिनर युजवेंद्र चहल ने 14 मैचों में 18 विकेट लिए। चेन्नई के खिलाफ मैच में तो उन्होंने चार ओवरों में महज छह रन देकर एक विकेट लिया था। उनकी इकॉनोमी रेट इस मैच में 1.50 रन प्रति ओवर की रही जोकि इस सीजन में किसी गेंदबाज का रिकॉर्ड है।
भारतीय चयनकर्ताओं ने विश्व कप के लिए बल्लेबाजी क्रम में बहुचर्चित चौथे स्थान के लिए विजय शंकर पर दांव खेला लेकिन तमिलनाडु का यह बल्लेबाजी ऑलराउंडर उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया। शंकर ने हैदराबाद की तरफ से 15 मैचों में 20.33 की औसत से 244 रन बनाए और उनका उच्चतम स्कोर नाबाद 40 रन रहा।
गेंदबाज के रूप में उन्हें केवल पांच मैचों में आठ ओवर करने का मौका मिला जिसमें उन्होंने 70 रन देकर एक विकेट लिया। दिनेश कार्तिक की 97 रन की एक पारी को छोड़ दें तो वह ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाए। केदार जाधव का प्रदर्शन भी खास नहीं रहा।