आईओए के शीर्ष अधिकारियों के दिमाग में मेजबानी के लिये दिल्ली और मुंबई का नाम है पर दूसरे शहरों को नकारा नहीं जा सकता। यह पहली बार है जब आईओए ने आधिकारिक रूप से ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा, ' यह सिर्फ पहला चरण है, जब कोई देश ओलंपिक की बोली के लिए इच्छा व्यक्त करता है और बाद के चरणों में मेजबान शहर या शहरों के नाम की घोषणा बोली में करता है। इससे पहले भारत ने कभी ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए इच्छा नहीं जतायी थी।'
ओलंपिक 2032 के लिए बोली प्रक्रिया की शुरूआत 2022 में होगी और मेजबान शहर के नाम की घोषणा 2025 में की जाएगी। इस साल एशियाई खेलों की सफल मेजबानी करने वाले इंडोनेशिया ने भी इस ओलंपिक के बोली लगाने की इच्छा जतायी है। इसकी दौड़ में चीन का शंघाई शहर और आस्ट्रेलिया का ब्रिसबेन शहर भी शामिल हो सकते हैं।
उत्तर और दक्षिण कोरिया भी संयुक्त रूप से इसकी मेजबानी की इच्छा व्यक्त कर सकते है जबकि जर्मनी 2032 ओलंपिक को देश के 13 शहरों में कराना चाहता है। आईओए बोली प्रक्रिया में शामिल होने योजना बना रहा है और 22 दिसंबर को होने वाले आगामी आम सभा में इस मुद्दे पर सरकार से समर्थन मंगाने का प्रस्ताव पारित होने की उम्मीद है।
मेहता ने कहा, ' आम बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद हम बोली की समर्थन के लिए सरकार से संपर्क करेंगे। बोली प्रक्रिया 2022 में शुरू होगी लेकिन उससे पहले हमें केन्द्र सरकार से समर्थन लेना होगा।' उन्होंने कहा, ' हमें केन्द्र सरकार, मेजबानी के लिए चयनित राज्य सरकार और नेता प्रतिपक्ष का भी समर्थन पत्र चाहिए।'
मेहता ने कहा, ' हमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों से गारंटी भी चाहिए लेकिन यह सब तभी शुरू होगा जब सरकार इस बोली का समर्थन करेगी।' सरकार का रुख इस मामले पर ज्यादा उत्साहवर्धक नहीं रहा है। खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस ओर इशारा किया था कि भारत इतना बड़ा आयोजन करने की जगह ओलंपिक में पदक जीतने के लिए आधारभूत संरचनाओं पर ज्यादा खर्च करना चाहेगा।
मेहता ने कहा, 'हमने बोली के बारे में सरकार को बता दिया है लेकिन खेल मंत्रालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। आईओए के स्तर पर हमने बोली प्रक्रिया के लिए काम करना शुरू कर दिया है। हम जो कर सकते है करेंगे बाकी सरकार के ऊपर है।'
उन्होंने कहा, ' चीन ने ओलंपिक की मेजबानी की है और वह 2022 में शीतकालीन ओलंपिक की मेजबानी करेगा। अगर दक्षिण कोरिया ओलंपिक की मेजबानी कर सकता है तो भारत क्यों नहीं। हमारा देश काफी बड़ा है, हम बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की तरफ बढ़ रहे हैं।'