एशेज सीरीज के विजेता को दिए जाने वाले अर्न में राख होती है जो प्रतिकात्मक तौर पर इंग्लिश क्रिकेट का अवशेष माना जाता है। इसकी शुरुआत 137 साल पहले 1882 में हुई थी। तक क्रिकेट के जनक इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया ने द ओवल टेस्ट मैच में हराया था। इस हार के बाद ब्रिटेन के अखबार द स्पोर्टिंग टाइम ने व्यंगात्मक तौर पर एक शोक संदेश प्रकाशित किया। इसमें लिखा इंग्लिश क्रिकेट की मौत हो गई, शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया और राख (अंग्रेजी में एशेज) ऑस्ट्रेलिया ले जाया गया। तब इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान रहे इवो ब्लाइ ने शपथ ली थी कि वह एशेज को फिर से अपने देश वापस लेकर आएंगे। इसके बाद से ही ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड टेस्ट सीरीज को एशेज नाम दे दिया।
एशेज अर्न के अंदर लकड़ी की गिल्लियों (स्टंप बेल्स) की राख रखी गई है। मजाक के तौर पर इसे ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की राख कहते हैं।