प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विराट कोहली
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भारतीय कप्तान विराट कोहली का मानना है कि दिन-रात्रि टेस्ट कभी-कभार ठीक है, लेकिन नियमित आधार पर नहीं। उनका मानना है कि सुबह लाल गेंद से शुरुआत करने की खूबसूरती की किसी मनोरंजन से तुलना नहीं की जा सकती।
दिन-रात्रि टेस्ट को लेकर अपना नजरिया स्पष्ट करते हुए कोहली ने कहा कि यह कभी-कभार ठीक है, लेकिन नियमित आधार पर नहीं। मेरा मानना है कि सिर्फ इसी तरह से टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला जाना चाहिए। इससे सुबह के सत्र का सामना करने की नर्वसनेस खत्म हो जाएगी।’
हॉकी जैसी भारी गेंद: कोहली का मानना है कि गुलाबी गेंद हॉकी जैसी भारी है। इससे क्षेत्ररक्षण के समय भी चुनौतियां बड़ी हैं। विराट ने कहा कि स्लिप में फील्डिंग करते समय गेंद इतनी सख्त लगती है जैसे हॉकी की गेंद। वैसे ही जैसे हम लड़कपन के दिनों में सिथैंटिक गेंदों से महसूस किया था। इससे थ्रो करने में भी ज्यादा प्रयास करने पड़ते हैं। दिन के समय गुलाबी गेंद से ऊंची कैच पकड़ना आसान नहीं है। मेरे लिहाज से फील्डिंग ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।
अभ्यास मैच मिलेगा तो ऑस्ट्रेलिया से खेलेंगे: कोहली ने कहा कि अगले साल ऑस्ट्रेलिया में वह दिन रात का टेस्ट खेलने को तैयार है, बशर्ते टीम को एक अभ्यास खेलने को मिले। भारतीय टीम ने 2107-18 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर दिन रात का टेस्ट खेलने से इनकार कर दिया था। अब यहां शुक्रवार से बांग्लादेश के खिलाफ वह पहला दिन रात का टेस्ट खेलने जा रहे हैं।
यह पूछने पर कि क्या अगले साल के दौरे पर वह ऑस्ट्रेलिया में दिन रात का टेस्ट खेलेंगे, कोहली ने हां में जवाब दिया लेकिन कहा कि उनकी एक शर्त है। उन्होंने कहा कि जब भी यह होगा, इससे पहले एक अभ्यास मैच रखना होगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम ने 2017-18 में एडिलेड में दिन रात का टेस्ट खेलने से इनकार कर दिया था क्योंकि टीम को अनुकूलन के लिए अभ्यास मैच नहीं मिला था। उन्होंने कहा कि हम गुलाबी गेंद से क्रिकेट खेलना चाहते थे। अब ऐसा हो रहा है। एक बड़े दौरे पर अचानक यह नहीं हो सकता कि हम गुलाबी गेंद से खेले बिना ही टेस्ट खेलने को तैयार हो जाएं। हमने गुलाबी गेंद से कोई प्रथम श्रेणी मैच भी नहीं खेला था।