श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भारत ने 1-0 से जीत दर्ज की। हालांकि सीरीज में कई सवालों के जवाब मिले, वहीं कुछ चिंताएं अब भी बरकरार हैं। सबसे बड़ी सकारात्मक बात देवदत्त पडिक्कल का नंबर-3 पर शानदार प्रदर्शन और युवा बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार का प्रभावशाली प्रदर्शन रहा। पडिक्कल ने बल्लेबाजी में अपनी दावेदारी मजबूत की, जबकि सुथार ने रवींद्र जडेजा के बाद भारत के प्रमुख टेस्ट स्पिनर के रूप में लंबी पारी के लिए खुद को तैयार साबित किया। दूसरी ओर, गेंदबाजी की अंतिम पारी में भारत के प्रदर्शन ने टीम प्रबंधन को एक बार फिर सोचने पर मजबूर किया है।
नंबर-3 पर पडिक्कल ने मजबूत की दावेदारी
- देवदत्त पडिक्कल इस सीरीज में भारत के सबसे बड़े हासिल के रूप में उभरे। उन्होंने तीन पारियों में 328 रन बनाए और उनका औसत 109.33 रहा। इस दौरान उन्होंने दो शतक भी लगाए और उन्हें सीरीज का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।
- स्पिन के खिलाफ पडिक्कल की बल्लेबाजी खास तौर पर चर्चा में रही। जहां श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने भारतीय स्पिनरों से निपटने के लिए स्वीप और उसके अलग-अलग रूपों का सहारा लिया, वहीं पडिक्कल ने बैकफुट प्ले और शानदार फुटवर्क को अपना हथियार बनाया।
- उनके शुरुआती कोच मोहम्मद नसीरुद्दीन के मुताबिक, सीरीज से पहले पड्डिकल ने स्पिन के खिलाफ इसी पहलू पर काफी काम किया था। उन्होंने कहा, 'अगर आप क्रीज पर टिके रहते हैं तो स्पिनरों के खिलाफ खेलना मुश्किल होता है। इसलिए हम गेंद के जितना करीब हो सके जाने या आगे निकलकर ड्राइव खेलने की ट्रेनिंग कर रहे थे।'
- पडिक्कल के इस प्रदर्शन ने नंबर-3 की जगह को लेकर चल रही बहस को काफी हद तक खत्म कर दिया है। साई सुदर्शन के चोट से वापसी करने के बाद भी पड्डिकल इस स्थान के मजबूत दावेदार नजर आ रहे हैं। कप्तान शुभमन गिल ने भी मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर पड्डिकल इसी तरह बल्लेबाजी करते रहे तो उन्हें नंबर-3 पर निश्चित तौर पर मौका दिया जाएगा।
ध्रुव जुरेल ने भी किया प्रभावित
ध्रुव जुरेल ने भी निचले क्रम में भारत को नई रणनीतिक मजबूती दी है। विकेटकीपर-बल्लेबाज जुरेल अब ऋषभ पंत के पीछे नंबर-6 पर विशेषज्ञ बल्लेबाज की भूमिका निभा रहे हैं। जुरेल की सबसे बड़ी खासियत परिस्थितियों के मुताबिक अपना खेल बदलने की क्षमता है। गाले में उन्होंने पड्डिकल के शतक के बाद तेज अर्धशतक लगाया, जबकि एसएससी में पहले आक्रामक अंदाज में पंत का साथ दिया और फिर खुद शतक जड़ दिया।
स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के खिलाफ उनका आत्मविश्वास भी खास रहा। दूसरे टेस्ट में जुरेल ने स्पिनरों की 101 गेंदों का सामना करते हुए 56 रन बनाए। तेज गेंदबाजों ने उन्हें बाउंसर से परेशान करने की कोशिश की, लेकिन सात बाउंसर में ही जुरेल ने 15 रन बना लिए। इसके बाद श्रीलंकाई गेंदबाजों ने यह रणनीति लगभग छोड़ दी। ऐसे में जुरेल भारत के लिए नंबर-6 पर परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालने वाले बेहद उपयोगी बल्लेबाज बनकर उभरे हैं।
मानव सुथार ने दिखाया भविष्य का रास्ता
- युवा बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार ने भी सीरीज में अपनी छाप छोड़ी। गाले में उन्होंने परिस्थितियों का भरपूर फायदा उठाते हुए मैच में 10 विकेट हासिल किए। कोलंबो के एसएससी मैदान पर परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं। यहां पिच धीमी थी और गेंद को ज्यादा मदद नहीं मिल रही थी। इसके बावजूद सुथार ने करीब 63 ओवर गेंदबाजी कर छह विकेट हासिल किए।
- गॉल में जहां वह 80 किलोमीटर प्रति घंटे से कुछ ज्यादा की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे थे, वहीं एसएससी की धीमी पिच पर उन्हें करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की अतिरिक्त गति से गेंदबाजी करनी पड़ी ताकि गेंद से कुछ टर्न और पकड़ हासिल की जा सके।
- भारत के स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने सुथार की तारीफ करते हुए कहा कि यह उनके लिए सीखने का अनुभव है। उन्होंने कहा, 'यह मानव का तीसरा टेस्ट है और उसे अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। वह जानते थे कि बल्लेबाज उन पर हमला करेंगे। वह सीख रहे हैं। हमें उनकी सबसे अच्छी बात उनका जुझारूपन लगता है। वह हमेशा 100 प्रतिशत देते हैं।'
प्रसिद्ध कृष्णा से मिली राहत, सिराज पर सवाल
तेज गेंदबाजी में प्रसिद्ध कृष्णा भारत के लिए सकारात्मक पक्ष रहे। उन्होंने चारों पारियों में लगातार गति और ऊर्जा के साथ गेंदबाजी की। हालांकि उन्हें कई मौकों पर मुख्य तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज की कमी भी पूरी करनी पड़ी। सिराज इस सीरीज में अपने सामान्य प्रभाव में नजर नहीं आए और उनके नाम सिर्फ चार विकेट रहे।
कप्तान शुभमन गिल ने सिराज को लेकर किसी चोट की आशंका से इनकार किया। भारत के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने भी सिराज का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी सीरीज में टीम का नेतृत्व किया और मुश्किल परिस्थितियों में भी लगातार प्रयास किया। मोर्कल के मुताबिक, सिराज ऐसे खिलाड़ी हैं जो शारीरिक तकलीफ के बावजूद लगातार गेंदबाजी करते रहते हैं। उन्होंने उन्हें भारतीय गेंदबाजी इकाई का अहम सदस्य और लीडर बताया।
आखिरी पारी ने फिर बढ़ाई चिंता
हालांकि सीरीज में भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता आखिरी पारी में सामने आई। श्रीलंका के बल्लेबाजों ने कोलंबो टेस्ट की दूसरी पारी में करीब पांच सत्र तक बल्लेबाजी करते हुए मैच ड्रॉ करा दिया। डेब्यू कर रहे ऑफ स्पिनर सारांश जैन प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। उनकी गेंदबाजी में लेंथ की निरंतरता नहीं दिखी और वह श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर पर्याप्त दबाव नहीं बना सके। इस प्रदर्शन के बाद टीम प्रबंधन के सामने स्पिन संयोजन को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। गाले में एक अपेक्षाकृत कमजोर टेस्ट खेलने वाले कुलदीप यादव को बाहर रखने या टीम में बनाए रखने को लेकर चर्चा संभव है।
1-0 की जीत से फिलहाल राहत
कुछ कमजोरियों के बावजूद भारत के लिए यह सीरीज सकारात्मक रही। पडिक्कल और जुरेल ने बल्लेबाजी क्रम को मजबूती दी, जबकि सुथार ने भविष्य के लिए अपनी दावेदारी पेश की। कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर के लिए सबसे बड़ी राहत यह होगी कि भारत ने सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली। इससे टेस्ट टीम को लेकर उठ रहे कई सवाल फिलहाल कुछ समय के लिए शांत हो सकते हैं। लेकिन गेंदबाजी, खासकर लंबी पारियों में विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखने की क्षमता, भारत के लिए आगे भी अहम चुनौती बनी रहेगी।